मप्र उच्च न्यायालय ने एवरेस्ट विजेता की याचिका पर शीर्ष खेल अलंकरण को लेकर मांगा जवाब

मप्र उच्च न्यायालय ने एवरेस्ट विजेता की याचिका पर शीर्ष खेल अलंकरण को लेकर मांगा जवाब

मप्र उच्च न्यायालय ने एवरेस्ट विजेता की याचिका पर शीर्ष खेल अलंकरण को लेकर मांगा जवाब
Modified Date: January 22, 2026 / 08:38 pm IST
Published Date: January 22, 2026 8:38 pm IST

इंदौर, 22 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले पर्वतारोही मधुसूदन पाटीदार की याचिका पर राज्य के शीर्ष खेल अलंकरण ‘विक्रम पुरस्कार’ के लिए अन्य एवरेस्ट विजेता भावना डेहरिया के चयन को लेकर राज्य सरकार से बृहस्पतिवार को जवाब तलब किया।

पाटीदार ने एवरेस्ट फतह करने के मामले में वरिष्ठता के आधार पर इस अलंकरण पर दावा करते हुए डेहरिया के चयन को अदालत में चुनौती दी है।

पाटीदार की रिट अपील पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सर्राफ की युगल पीठ ने राज्य सरकार के साथ ही खेल एवं युवा कल्याण विभाग के निदेशक और डेहरिया को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए छह फरवरी की तारीख तय की है।

पाटीदार ने 2017 के दौरान माउंट एवरेस्ट फतह किया था, जबकि डेहरिया ने 2019 के दौरान इस सर्वोच्च पर्वत शिखर पर जीत हासिल की थी।

पाटीदार की रिट याचिका उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने पिछले साल आठ दिसंबर को यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि डेहरिया को साहसिक खेलों की श्रेणी में 2023 का विक्रम पुरस्कार प्रदान किए जाने के निर्णय में राज्य सरकार ने कोई चूक नहीं की है।

पाटीदार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय की युगल पीठ में रिट अपील दायर की है।

पाटीदार ने इस याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर उच्च न्यायालय से गुहार लगायी है कि राज्य सरकार द्वारा डेहरिया को विक्रम पुरस्कार प्रदान किये जाने पर रोक लगाई जाई।

पाटीदार की दलील है कि पर्वतारोहण के क्षेत्र में वरिष्ठता के आधार साहसिक खेलों की श्रेणी में 2023 का विक्रम पुरस्कार नियमानुसार उन्हें दिया जाना चाहिए।

रिट अपील में कहा गया है कि इस पुरस्कार के लिए डेहरिया के चयन की प्रक्रिया ‘त्रुटिपूर्ण’ है और इस सिलसिले में पाटीदार की वरिष्ठता और उपलब्धियों को ‘मनमाने और भेदभावपूर्ण तरीके’ से नजरअंदाज किया गया है।

मध्यप्रदेश पुरस्कार नियम 2021 के मुताबिक साहसिक खेलों की श्रेणी में वे खिलाड़ी पुरस्कार के आवेदन के लिए पात्र होते हैं जिन्होंने पिछले पांच सालों में साहसिक खेल गतिविधियों में निरंतर भाग लेते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ विशेष उपलब्धियां अर्जित की हों।

इस आधार पर पाटीदार की रिट याचिका निरस्त करते हुए उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने आठ दिसंबर को कहा था कि आठ साल पहले एवरेस्ट फतह करने वाले पाटीदार 2023 के विक्रम पुरस्कार के लिए पात्र ही नहीं थे, इसलिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उनका दावा खारिज किए जाने का फैसला सही है।

इस आदेश के खिलाफ दायर रिट अपील में पाटीदार का एक तर्क यह भी है कि राज्य सरकार ने साहसिक खेलों की श्रेणी में 2022 के विक्रम पुरस्कार के वास्ते न तो कोई अधिसूचना जारी की और न ही किसी को यह अलंकरण प्रदान किया, इसलिए 2023 के विक्रम पुरस्कार पर उनका हक बनता है।

‘विक्रम पुरस्कार’, राज्य का सबसे बड़ा खेल अलंकरण है जिसे 1972 से प्रदान किया जा रहा है। अलग-अलग खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 12 वरिष्ठ खिलाड़ियों को इस अलंकरण से नवाजा जाता है।

‘विक्रम पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने वाले हर खिलाड़ी को दो लाख रुपये और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है। इस अलंकरण से सम्मानित खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करके शासकीय सेवा में नियुक्ति भी दी जाती है।

भाषा हर्ष

राजकुमार

राजकुमार


लेखक के बारे में