इंदौर (मध्यप्रदेश), पांच फरवरी (भाषा) इंदौर के एक शासकीय महाविद्यालय के छात्रावास में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र की खुदकुशी के बाद उसके परिजनों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि संस्थान में उसकी ‘रैगिंग’ की जाती थी और उसे परेशान किया जाता था।
छात्र के परिजनों ने उसकी मौत के मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। पुलिस के मुताबिक शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र अंतरिक्ष अग्रवाल (20) का शव दो फरवरी को संस्थान के छात्रावास में उसके कमरे में पंखे से बंधे फंदे से लटका मिला था।
अंतरिक्ष के पिता पंकज अग्रवाल ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘महाविद्यालय में रैगिंग और बुलिंग (परेशान किए जाने) के बाद मेरा बेटा अंदर से टूट गया था। हमने उसे समझाया था कि वह कुछ वक्त तक हालात से तालमेल बैठाए। हमें कल्पना तक नहीं थी कि वह परेशान होकर जान देने का कदम उठा लेगा।’’
ग्वालियर जिले के रहने वाले अग्रवाल पेशे से कारोबारी हैं। उन्होंने बताया कि जब वह बेटे का शव लेने इंदौर गए थे, तब पुलिस ने उनसे कहा था कि छात्रावास के सीसीटीवी कैमरों का फुटेज हासिल किया जा रहा है और बाद में उनके विस्तृत बयान दर्ज किए जाएंगे।
अग्रवाल ने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि मेरे बेटे की मौत के मामले की विस्तृत जांच हो।’’
अंतरिक्ष की चचेरी बहन श्रुति अग्रवाल ने बताया कि उनके भाई ने शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में पिछले साल दाखिला लिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘अंतरिक्ष ने हमें महाविद्यालय में रैगिंग और परेशान किए जाने के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि कनिष्ठ छात्रों को वरिष्ठ छात्रों के बनाए कई नियमों का पालन करना पड़ता है।’’
श्रुति के मुताबिक इन कथित नियमों में यह भी शामिल है कि कनिष्ठ विद्यार्थी रात के वक्त भी छात्रावास में अपने कमरे का दरवाजा बंद करके नहीं सो सकते क्योंकि वरिष्ठ छात्रों को कभी भी उनके कमरे में आने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, ‘‘अंतरिक्ष ने मुझे इस नियम के बारे में भी बताया था कि कनिष्ठ विद्यार्थी, वरिष्ठ छात्रों के सामने सिर उठाकर नहीं चल सकते और उन्हें अपने जूतों की ओर देखते हुए चलना होता है। अगर कोई वरिष्ठ छात्र मेस (भोजनशाला) में है, तो कनिष्ठ छात्रों को वहां खड़े होकर भोजन करना होता है। इसके अलावा, वरिष्ठ छात्रों ने कनिष्ठ छात्रों के लिए एक ड्रेस कोड भी तय कर रखा है।’’
पुलिस के मुताबिक उसे आत्महत्या से पहले एमबीबीएस छात्र का छोड़ा गया कोई पत्र नहीं मिला है और उसके साथी विद्यार्थियों से पूछताछ में पता चला कि वह कथित तौर पढ़ाई को लेकर तनाव में था।
बहरहाल, अंतरिक्ष के परिजन यह बात मानने को तैयार नहीं हैं कि उसने पढ़ाई के तनाव के कारण खुदकुशी की।
उसकी चचेरी बहन श्रुति ने कहा, ‘‘मेरे भाई ने तीसरे प्रयास में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) में सफलता हासिल करते हुए इंदौर के चिकित्सा महाविद्यालय में दाखिला लिया था। वह इस प्रवेश परीक्षा की मेधा सूची में राज्य के शीर्ष 50 विद्यार्थियों में शामिल था। वह पढ़ाई के तनाव के कारण हिम्मत नहीं हार सकता था।’’
सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) तुषार सिंह के मुताबिक पोस्टमॉर्टम के बाद एमबीबीएस छात्र का शव सौंपे जाने के वक्त उसके परिजनों ने महाविद्यालय में कथित ‘रैगिंग’ और ‘बुलिंग’ को लेकर पुलिस को कोई शिकायत नहीं की थी और उनके औपचारिक बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं।
एसीपी ने बताया, ‘‘पोस्टमॉर्टम के वक्त अंतरिक्ष के परिजन शोक में थे। उन्होंने कहा था कि वे अंतिम संस्कार के बाद शांत दिमाग से बयान दर्ज कराएंगे। अगर वे कथित रैगिंग और बुलिंग के पहलू के बारे में बयान दर्ज कराते हैं, तो हम जांच करके उचित कदम उठाएंगे।’’
चिकित्सा महाविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि एमबीबीएस छात्र की मौत की वजह की जांच के लिए संस्थान की ओर से एक समिति बनाई गई है और समिति की छानबीन जारी है।
भाषा हर्ष शोभना सुरभि
सुरभि