इंदौर में पेयजल के 90 प्रतिशत से ज्यादा नमूने दूषित पाए गए: कांग्रेस का दावा

इंदौर में पेयजल के 90 प्रतिशत से ज्यादा नमूने दूषित पाए गए: कांग्रेस का दावा

इंदौर में पेयजल के 90 प्रतिशत से ज्यादा नमूने दूषित पाए गए: कांग्रेस का दावा
Modified Date: May 26, 2026 / 10:14 pm IST
Published Date: May 26, 2026 10:14 pm IST

इंदौर, 26 मई (भाषा) मध्यप्रदेश कांग्रेस समिति ने अपने एक अध्ययन के हवाले से मंगलवार को दावा किया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में पेयजल के 90 प्रतिशत से ज्यादा नमूने दूषित पाए गए हैं।

स्थानीय प्रशासन ने इस अध्ययन की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रमुख विपक्षी दल पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भ्रम फैलाते हुए जनता को डराने की कोशिश कर रहा है।

कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जल संकट को लेकर यहां एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में सामने आई पेयजल त्रासदी के बाद पार्टी ने एक एजेंसी के माध्यम से शहर के अलग-अलग स्थानों से पानी के करीब 300 नमूने लिए।

उन्होंने जांच के परिणामों का विशिष्ट ब्योरा दिए बगैर कहा,‘‘जांच में 90 प्रतिशत से ज्यादा नमूने जहरीले (दूषित) पाए गए हैं। विस्तृत जांच रिपोर्ट तीन दिन में सार्वजनिक की जाएगी।’’

पटवारी ने कहा कि शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पेशे से वकील हैं और कांग्रेस उन्हें चुनौती देती है कि वह इस रिपोर्ट के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘महापौर में जरा भी इंसानियत और स्वाभिमान बचा हो, तो उन्हें इसी वक्त इस्तीफा दे देना चाहिए।’’

पटवारी ने जल संकट को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि नगर निगम से लेकर प्रदेश और केंद्र की सत्ता संभाल रहा दल इंदौर की जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसा रहा है।

उधर, महापौर भार्गव ने पटवारी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भ्रम फैलाते हुए जनता को डराने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को चुनौती देता हूं कि वह शहर की जल प्रबंधन व्यवस्था को लेकर मुझसे सार्वजनिक मंच पर बहस करें।’’

स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त के प्रकोप में 36 लोगों की मौत का दावा किया है।

हालांकि, इस मामले पर चर्चा के दौरान विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई है और हर मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों की मौत के मामले की जांच कर रहा है।

न्यायालय ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए 14 जून तक की मोहलत दी है।

हर्ष शोभना

शोभना


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