शह मात The Big Debate: टीम बीजेपी… नया समीकरण, बैलेंस पर भारी तुष्टिकरण? महाराज बनाम तोमर को लेकर छिड़ी जुबानी जंग, क्या लिस्ट में दिखा सिंधिया फैक्टर का असर?

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MP Politics News: मध्यप्रदेश बीजेपी ने अपनी बहुप्रतीक्षित प्रदेश कार्यसमिति की लिस्ट घोषित कर दी। लिस्ट आते ही सियासी घमासान मच गया।

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  • Publish Date - June 23, 2026 / 11:38 PM IST,
    Updated On - June 23, 2026 / 11:39 PM IST

MP Politics News/Image Credit: IBC24.in

HIGHLIGHTS
  • मध्यप्रदेश बीजेपी ने अपनी बहुप्रतीक्षित प्रदेश कार्यसमिति की लिस्ट घोषित कर दी।
  • लिस्ट आते ही सूबे में सिंधिया बनाम तोमर को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई।
  • बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की लिस्ट को लेकर कांग्रेस तंज कसना नहीं भूली।

MP Politics News: भोपाल: मध्यप्रदेश बीजेपी ने अपनी बहुप्रतीक्षित प्रदेश कार्यसमिति की लिस्ट घोषित कर दी, लेकिन लिस्ट आते ही सूबे में सिंधिया बनाम तोमर को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई। दरअसल, बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति कई मायनों में पार्टी में नए परिवर्तन को बयां कर रही है। ये लिस्ट पिछली कार्यसमिति जैसी जम्बो नहीं है। पिछली बार प्रदेश कार्यसमिति में 200 नाम थे जबकि इस बार केवल 106 हैं। वहीं इस लिस्ट में 33 फीसदी महिलाएं है। साथ ही एक मुस्लिम महिला को भी जगह मिली है। वहीं पिछली लिस्ट के कई बड़े नामों को TATA BYE BYE कह दिया गया है। साथ ही लिस्ट में में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की खींचतान भी साफ-साफ नजर आ रही है। कुछ तोमर समर्थक सांसद भी लिस्ट से बाहर हैं, तो कुछ सिंधिया समर्थक भी लिस्ट से आउट हैं। लिहाजा, इलाकाई और क्षत्रपों के तुष्टिकरण के भरसक प्रयास वाली इस लिस्ट को भाजपा सर्वोत्तम बता रही है।

इधर बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की लिस्ट को लेकर कांग्रेस तंज कसना नहीं भूली। (MP Politics News) कांग्रेस ने कहा कि- सिंधिया जी के समर्थकों को बीजेपी ने मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया।

MP Politics News: लेकिन सवाल ये कि सिंधिया समर्थक जो अब प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बन गए हैं, क्या अब उनकी निगम मंडल से दावेदारी ख़त्म हो गई है? सवाल ये भी कि कांग्रेस से भाजपा में आए कई नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति सदस्य से बाहर कर बीजेपी क्या मैसेज देना चाह रही है? क्या अगले चुनाव में उनकी टिकट की दावेदारी भी ख़त्म मानी जाए? (MP Politics News) सवाल ये कि भी कि – स्थायी आमंत्रित सदस्यों की लिस्ट में कुछ वरिष्ठ नेताओं का नाम क्या वाकई उनके रिटायरमेंट का संकेत है?

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