मप्र दूषित पेयजल: एनजीटी ने जांच के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया

मप्र दूषित पेयजल: एनजीटी ने जांच के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया

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  • Publish Date - January 16, 2026 / 12:06 AM IST,
    Updated On - January 16, 2026 / 12:06 AM IST

भोपाल, 15 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के शहरों में सीवेज-मिश्रित और दूषित पेयजल की आपूर्ति को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ‘गंभीर खतरा’ बताते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्र पीठ ने बृहस्पतिवार को ऐसे मामलों की जांच के लिए छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया।

यह आदेश राज्य की वाणिज्यिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत की पृष्ठभूमि में दिया गया है।

एनजीटी के न्यायधीश शिव कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और ईश्वर सिंह (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने हरित कार्यकर्ता कमल कुमार राठी की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया और राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सभी स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय की।

वरिष्ठ अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया कि याचिकाकर्ता के अनुसार, भोपाल के तालाबों में मल बैक्टीरिया की मात्रा खतरनाक स्तर (1600 मिलीलीटर) पर है और सीवेज लाइन, पीने के पानी की लाइनों को दूषित कर रही हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 21 (नागरिकों के जीवन की सुरक्षा का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।

पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमीनी हकीकत की जांच के लिए छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

गुप्ता ने कहा, ‘‘समिति में आईआईटी, इंदौर के निदेशक द्वारा नामित एक विशेषज्ञ, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), भोपाल के प्रतिनिधि, राज्य के पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव, शहरी प्रशासन और विकास विभाग के प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग के प्रतिनिधि और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) के प्रतिनिधि नोडल एजेंसी के रूप में शामिल हैं।’’

एनजीटी ने विशेष रूप से आदेश दिया है कि इसकी एक प्रति मध्यप्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों को भेजी जाए ताकि निर्देशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

हरित पीठ ने दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण इंदौर के एक क्षेत्र में फैले बीमारी के प्रकोप, पर्यावरणीय संकट तथा राज्य भर के अन्य शहरों में इसी तरह के प्रणालीगत जोखिमों पर भी प्रकाश डाला।

दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र के निवासियों को नगर निगम की पाइपलाइनों के माध्यम से आपूर्ति किए गए गंभीर रूप से दूषित पानी के संपर्क में आने से बड़े पैमाने पर जल जनित बीमारियां फैलीं। प्रभावितों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें कई रोगियों को गहन देखभाल की आवश्यकता पड़ी और इस घटना में कई मौतें भी हुईं।

अदालत ने राज्यभर में शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए, जिनमें पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट, आपूर्ति समय और शिकायत निवारण के लिए एक मजबूत प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) और मोबाइल ऐप तैयार करना शामिल हैं।

भाषा ब्रजेन्द्र खारी

खारी