शिखिल ब्यौहार/भोपालः Politics started in Bhopal इन दिनों मध्य प्रदेश में कोई भी नया नियम-कानून बनता है तो उसे मजहबी रंग देने की कोशिश की जाने लगती है। अब मीट शॉप पर मजहबी बंटवारे जैसी नौबत आ गई है। भोपाल की मेयर ने मीट शाप के लिए एक नई गाइडलाइन बनाई…जिसके विरोध में कांग्रेस झंडे लेकर खड़ी हो गई है। कांग्रेस कह रही है की मीट सिर्फ मुसलमान नहीं खाते हैं। जो यही नहीं गाइडलाइन बनाई गई है। सवाल ये भी है कि कांग्रेस को क्यों ये लग रहा है कि नियम सिर्फ मुसलमानों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
Politics started in Bhopal राजधानी भोपाल में कुछ माह पहले ही अस्तित्व में आई शहर सरकार एक्शन मोड में हैं..महापौर मालती राय नए-नए आदेश-निर्देश जारी कर रही हैं। विवाद महापौर के मांस की दुकानों और विक्रेताओं को लेकर बयान से शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि अब खुले में न तो मीट मिलेगा। न ही पशुवध होगा और न ही मीट दुकानों में शो केस या कांच में सजाकर मांस रखा जा सकेगा। इतना ही नहीं बल्कि मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों में वैध रूप से भी मांस का विक्रय नहीं होगा।
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मालती राय ने ये भी कहा कि मंदिर के पास जिन मांस विक्रेताओं के लाइसेंस हैं उन्हें भी निरस्त किए जाएंगे। जिसपर मांस विक्रेताओं ने आपत्ति दर्ज कराई है..वहीं नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने भी निर्णय पर सवाल उठाते हुए महापौर को तानाशाह बताया..साथ ही ये भी कहा कि मांस सिर्फ मुस्लिम नहीं बल्कि समाज का हर व्यक्ति सारे पंडित मांस खाते हैं। ये स्वतंत्रता का अधिकार है।
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कुल मिलाकर भोपाल में मीट की खुले में बिक्री पर बैन लगने के बाद विवाद बढ़ता ही जा रहा है। मामला हिंदू-मुसलमान तक पहुंच चुका है। अब मीट पर शुरू हुआ महासंग्राम कहां जाकर थमेगा, ये बड़ा सवाल है।