RKDF University: आरकेडीएफ विश्वविद्यालय में स्टार्टअप और आईपीआर पर मंथन, युवाओं को किया गया प्रेरित, ई. प्रवीण गुप्ता बोले- मेक इन इंडिया से इनोवेट इन इंडिया की ओर बढ़ रहा भारत
आरकेडीएफ विश्वविद्यालय में स्टार्टअप और आईपीआर पर मंथन, युवाओं को किया गया प्रेरित, RKDF University discusses startups and IPR
भोपाल। RKDF University में “मेक इन इंडिया के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर)” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 13 एवं 14 मई को किया गया। कार्यशाला में देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नवाचार, पेटेंट, स्टार्टअप एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व से अवगत कराना था।
कार्यशाला का शुभारंभ विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि CEA-MOP के सदस्य ई. प्रवीण गुप्ता ने कहा कि “मेक इन इंडिया केवल उत्पादन नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और बौद्धिक संपदा के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का अभियान है।” उन्होंने कहा कि भारत तेजी से नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और इस परिवर्तन में युवाओं, शोधकर्ताओं एवं तकनीकी संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शोध एवं नवाचार को पेटेंट के माध्यम से सुरक्षित करने तथा उद्योगों की वास्तविक समस्याओं के समाधान हेतु शोध आधारित कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय के. अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुसंधान, नवाचार एवं सृजनात्मक सोच विकसित करना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को उद्योग, अनुसंधान एवं स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। वहीं कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डीजीआर डॉ. वी.के. सेठी ने कार्यशाला की अवधारणा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकार किसी भी राष्ट्र की आर्थिक एवं तकनीकी प्रगति के प्रमुख आधार बन चुके हैं। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से अपने नवाचारों को सुरक्षित करने और उन्हें उद्यमिता से जोड़ने का आह्वान किया।
अतिथि वक्ताओं ने दिए इन विषयों पर व्याख्यान
दो दिनों तक आयोजित तकनीकी सत्रों में विभिन्न विशेषज्ञों ने बौद्धिक संपदा अधिकार, पेटेंट, स्टार्टअप एवं नवाचार से जुड़े विषयों पर व्याख्यान दिए। प्रो. एस.एस. संधू ने शोध एवं पेटेंट की गोपनीयता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शोध निष्कर्षों को पेटेंट कराने से पहले गोपनीय रखना आवश्यक है, ताकि बौद्धिक संपदा का दुरुपयोग न हो सके। डॉ. प्रशांत वी. बरेदर ने पेटेंट ड्राफ्टिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को विस्तार से समझाया। वहीं पेटेंट अटॉर्नी डॉ. कुमारी लिपी ने अकादमिक क्षेत्र में पेटेंट, ट्रेडमार्क एवं कॉपीराइट की प्रक्रियाओं पर जानकारी दी। वहीं दूसरे दिन डॉ. अजय कुमार चौबे ने विचारों को संपदा में बदलने की प्रक्रिया एवं स्टार्टअप संस्कृति पर मार्गदर्शन दिया, जबकि एडवोकेट अभय लुनिया ने पेटेंट एवं इंडस्ट्रियल डिजाइन से जुड़े कानूनी पहलुओं पर जानकारी साझा की। अंतिम तकनीकी सत्र में डॉ. गुरुराज डी. देवरहुबली ने “मेक इन इंडिया” से “इनोवेट इन इंडिया” की यात्रा में आईपीआर को महत्वपूर्ण उत्प्रेरक बताया।कार्यक्रम के अतिथि सौरभ रामचंद्र निर्मले ने विद्यार्थियों को नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका के प्रति प्रेरित किया।
वैलेडिक्टरी सत्र के साथ कार्यशाला का समापन
कार्यशाला का समापन 14 मई को आयोजित वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ। इस अवसर पर 160 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए तथा विशेषज्ञ वक्ताओं एवं अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ. साधना कपूर ने कार्यशाला के सफल आयोजन पर आयोजन समिति एवं प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में अनुसंधान और नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। कार्यक्रम में डीजीएम डॉ. बी.एन. सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुनील पाटिल, डीएसडब्ल्यू डॉ. रत्नेश जैन सहित विश्वविद्यालय के अनेक अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गगन शर्मा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन रजिस्ट्रार डॉ. सतेंद्र एस. ठाकुर द्वारा किया गया।
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