Dr BR Ambedkar Jayanti: भारत रत्न डॉ बाबा साहेब की जयंती पर मिली रिहाई.. इस जिले की जिले से बाहर आये एक महिला समेत 9 कैदी

Bharat Ratna Dr Bhim Rao Ambedkar Jayanti: अंबेडकर जयंती पर सागर जेल से महिला सहित 9 बंदी रिहा, विशेष माफी और सुधार नीति का अहम कदम

Dr BR Ambedkar Jayanti: भारत रत्न डॉ बाबा साहेब की जयंती पर मिली रिहाई.. इस जिले की जिले से बाहर आये एक महिला समेत 9 कैदी

Bharat Ratna Dr Bhim Rao Ambedkar Jayanti || IMAGE- ibc24 news file

Modified Date: April 14, 2026 / 01:50 pm IST
Published Date: April 14, 2026 1:50 pm IST
HIGHLIGHTS
  • अंबेडकर जयंती पर 9 बंदी रिहा
  • महिला सहित कैदियों को मिली विशेष माफी
  • दुष्कर्म और पॉक्सो दोषियों को नहीं छूट

सागर: आज देशभर में संविधान निर्माता, भारत रत्न डॉ बीआर अम्बेडकर की जन्म जयन्ती धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाई जा रही है। (Bharat Ratna Dr Bhim Rao Ambedkar Jayanti) इस मौके पर देश की राष्ट्रपति द्रौपती मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दिग्गज नेताओं और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने डॉ बाबा साहब को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नव-भारत के निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।

बाबा साहब के जयन्ती के इस विशेष अवसर पर देश के अलग अलग हिस्सों में उनके लिए श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही है। बाबा साहब की जन्मस्थली मऊ पहुंचे मध्यप्रदेश के सीएम डॉ मोहन यादव ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ आंबेडकर को न्याय, समानता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।

महिला समेत 9 बंदियों को मिली रिहाई

बात करें सागर जिले की तो डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर जेल प्रशासन ने विशेष पहल करते हुए 9 बंदियों को रिहा किया है। इनमें 8 पुरुष और 1 महिला शामिल हैं। इन सभी बंदियों को पहले उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन शासन के नए नियमों के तहत उन्हें विशेष माफी प्रदान की गई। (Bharat Ratna Dr Bhim Rao Ambedkar Jayanti) हालांकि, गंभीर अपराधों जैसे दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े दोषियों को इस छूट का लाभ नहीं दिया गया।

प्रशासन के अनुसार, अब वर्ष में पांच बार इस तरह की रिहाई का प्रावधान किया गया है, जिससे सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ाया जा सके। जेल में बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि रिहाई के बाद वे समाज की मुख्यधारा में जुड़ सकें। रिहाई के दौरान जेल प्रशासन ने सभी बंदियों से अपील की कि वे भविष्य में किसी भी प्रकार के अपराध से दूर रहें और एक जिम्मेदार नागरिक बनकर जीवन यापन करें।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि

आज बाबा साहब की जयन्ती पर राष्ट्रपति ने बाबा साहब के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित किया। उन्होंने खास सन्देश जारी करते हुए कहा, भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता, महान समाज सुधारक बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर मैं उन्हें सादर नमन करती हूं। बाबासाहेब अंबेडकर विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, प्रखर चिंतक, न्यायविद और समतामूलक समाज व्यवस्था के सशक्त प्रवक्ता थे। उन्होंने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष किया और उनके हित में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने न केवल असमानताओं को दूर करने का मार्ग दिखाया, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों को सुदृढ़ करने में भी अग्रणी भूमिका निभाई। बाबासाहेब ने महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों को प्राथमिकता दी। उनका बहुआयामी योगदान भावी पीढ़ियों को देश की सेवा और विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

आइए, इस अवसर पर हम बाबासाहेब अंबेडकर के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लें और एक न्यायपूर्ण, समावेशी तथा प्रगतिशील भारत के निर्माण में योगदान दें।

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पीएम मोदी ने कहा, ‘राष्ट्र निर्माण में उनके प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक’

इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि। राष्ट्र निर्माण में उनके प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक हैं। उनका जीवन और कार्य पीढ़ियों को एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा।”

जानें डॉ बाबा साहेब आंबेडकर के बारें में

डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिन्हें बाबासाहेब अंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है, भारत के महान समाज सुधारक, विधिवेत्ता और संविधान के प्रमुख शिल्पकार थे। उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में सामाजिक भेदभाव और जातिगत अन्याय का सामना किया, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश के अग्रणी विचारकों में स्थान बनाया।

डॉ. अंबेडकर ने भारत के संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और समानता, स्वतंत्रता तथा न्याय के सिद्धांतों को मजबूती दी। वे दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन माना और महिलाओं के अधिकारों तथा सामाजिक समरसता के लिए भी अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए।

उनका जीवन संघर्ष, शिक्षा और आत्मसम्मान का प्रतीक है। डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी समाज को प्रेरित करते हैं और एक समतामूलक, न्यायपूर्ण तथा प्रगतिशील भारत के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर हम एक बेहतर और समान समाज की स्थापना कर सकते हैं।

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