भोपाल, 11 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी समृद्धि सुनिश्चित करने को राज्य सरकार का ‘एकमात्र ध्येय’ बताते हुए रविवार को कहा कि इसके लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
यादव ने राज्य की राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन में यह बात कही और साथ ही 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा भी की।
उन्होंने कहा, ‘सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। आधुनिक प्रौद्योगिकी, उन्नत बीज, सिंचाई, भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा।’
उन्होंने कहा कि कृषि केवल आजीविका का एक साधन ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने कहा, ‘कृषि क्षेत्र के सशक्तीकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।’
यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने पूरा साल किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार खेतों से निकलने वाली पराली से भी किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां बीते सालों के प्रयासों से खेती का रकबा ढाई लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी लिंक एवं केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वाटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित होगा।
उन्होंने कहा, ‘किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए हमने जो कहा, वह करके दिखाया है।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए डिण्डोरी जिले में मध्यप्रदेश राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाएगी और इससे श्रीअन्न का उत्पादन एवं पोषण सुरक्षा को नयी ऊंचाई मिलेगी।
उन्होंने कहा कि ग्वालियर में सरसों अनुसंधान एवं उज्जैन में चना अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जा रहा हैं और इन केंद्रों के जरिए इन फसलों की गुणवत्ता एवं पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा।
यादव ने कहा कि प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सौर ऊर्जा पम्प दिए जाएंगे और हर साल 10 लाख किसानों को सौर पम्प देकर इन्हें अन्नदाता से आत्मनिर्भर ऊर्जादाता बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन के बाद अब सरसों की फसल को भी भावांतर योजना के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों के विकास में किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी और ऐसे उद्योग लगाने वालों को सरकार सब्सिडी देगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीज परीक्षण कार्य से जुड़ी सभी प्रयोगशालाओं को और अधिक सशक्त कर सभी मंडियों का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग और राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड में सभी श्रेणी के रिक्त पदों पर जल्द से जल्द भर्ती कर प्रदेश में कृषि तंत्र को और भी मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि फसलों को होने वाले नुक़सान का अब आधुनिक तकनीक से सर्वेक्षण कराया जाएगा और इससे किसानों को मुआवजे की राशि जल्द से जल्द मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेतों में पसीना बहाने वाले किसान राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च उदाहरण हैं और ऐसे में किसानों की सेवा, संबल और समृद्धि में सहयोग करना सरकार का कर्तव्य और धर्म है। उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि वे नयी तकनीकों को अपनाएं, बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलें और खेती को आधुनिक बनाएं।
यादव ने कहा कि कृषि क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और कृषि आधारित स्टार्ट-अप को बढ़ावा दिया जाएगा।
भाषा ब्रजेन्द्र सिम्मी
सिम्मी