महिला आरक्षण पर मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में कांग्रेस ने किया सदन से बहिर्गमन

Ads

महिला आरक्षण पर मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में कांग्रेस ने किया सदन से बहिर्गमन

  •  
  • Publish Date - April 27, 2026 / 03:48 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 03:48 PM IST

भोपाल, 27 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग वाले एक निजी विधेयक को अध्यक्ष की ओर से अस्वीकार किए जाने के विरोध में सोमवार को विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने निजी विधेयक पर चर्चा कराने से इनकार करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर एक सरकारी प्रस्ताव पहले ही सूचीबद्ध किया जा चुका है। इसके तत्काल बाद विपक्षी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार ने विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया है।

सरकार की ओर से चर्चा का विषय ‘नारी शक्ति वंदन – महिलाओं का समग्र विकास और उनका सशक्तीकरण’ तय किया गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव जैसे ही परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू करने का सरकार का प्रस्ताव पेश करने के लिए खड़े हुए, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया।

सिंघार ने कहा कि कांग्रेस 2023 में संसद द्वारा पारित महिला आरक्षण अधिनियम पर तत्काल चर्चा और उसे लागू करना चाहती है।

विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे सदन के नेता को प्रस्ताव पेश करने की अनुमति देने का आग्रह किया और कहा कि इसके बाद वह अपना फैसला सुनाएंगे।

कांग्रेस सदस्यों ने जोर देकर कहा कि उनके निजी विधेयक को समय पर प्रस्तुत किया गया है, इसलिए इस पर चर्चा की जानी चाहिए।

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और भाजपा के वरिष्ठ विधायक सीताशरण शर्मा ने तर्क दिया कि नियमों और परंपरा के तहत एक सरकारी प्रस्ताव को निजी विधेयक पर प्राथमिकता दी जाती है।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन ने सिंघार का समर्थन किया, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

व्यवस्था बहाल होने के बाद अध्यक्ष ने सरकारी प्रस्ताव पर विचार करने के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

बाद में विपक्ष ने विधानसभा परिसर में नारेबाजी की।

लोकसभा में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे।

विधेयक में 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की कवायद के बाद 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव किया गया था।

लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी।

सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन इन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

भाषा ब्रजेन्द्र रंजन

रंजन