कूनो में दो चीते खुले जंगल में छोड़े गए, मध्यप्रदेश को ‘चीता स्टेट’ की पहचान मिली : मोहन यादव

कूनो में दो चीते खुले जंगल में छोड़े गए, मध्यप्रदेश को ‘चीता स्टेट’ की पहचान मिली : मोहन यादव

कूनो में दो चीते खुले जंगल में छोड़े गए, मध्यप्रदेश को ‘चीता स्टेट’ की पहचान मिली : मोहन यादव
Modified Date: May 11, 2026 / 02:51 pm IST
Published Date: May 11, 2026 2:51 pm IST

श्योपुर, 11 मई (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि राज्य में चीता पुनर्स्थापन परियोजना लगातार सफलता की ओर बढ़ रही है और आज मध्यप्रदेश को देशभर में ‘चीता स्टेट’ के रूप में पहचान मिली है।

यादव ने सोमवार को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बोत्सवाना से लाए गए दो चीतों को पृथकवास (क्वारंटीन) अवधि पूरी होने के बाद खुले जंगल में छोड़ा।

मुख्यमंत्री ने कूनो नदी के किनारे स्थित क्षेत्र में सीसीवी-2 और सीसीवी-3 पहचान संख्या वाली मादा चीताओं को जंगल में छोड़ा।

एक अधिकारी ने बताया कि इससे ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति मिलेगी और भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ेगा।

उन्होंने बताया कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ का उद्देश्य राज्य में विलुप्तप्राय चीता प्रजाति को पुनर्स्थापित करना, उनकी संख्या बढ़ाना और उन्हें स्वतंत्र रूप से शिकार एवं विचरण के लिए तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश ने चीतों को अपनाकर उन्हें अपने परिवार का हिस्सा बना लिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘करीब साढ़े तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कूनो में चीता पुनर्स्थापन परियोजना की शुरुआत की थी और यह परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। मध्यप्रदेश इस महत्वपूर्ण परियोजना में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।’’

यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश धर्म, निवेश और आनुवंशिक जैव विविधता का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है।

दोनों चीतों को जंगल में छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण भी किया।

अधिकारी ने बताया कि फरवरी में बोत्सवाना से कूनो लाए गए नौ चीतों — जिनमें छह मादा और तीन नर शामिल हैं — को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने के लिए छोटे बाड़ों में रखा गया था। अब उनकी पृथकवास अवधि पूरी हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि इन चीतों के आने के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या, जिनमें देश में जन्मे शावक भी शामिल हैं, बढ़कर 57 हो गई है।

यह ‘प्रोजेक्ट चीता’ का तीसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय चरण है। इससे पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए थे, जबकि वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना से लाए गए चीते अधिक आनुवंशिक विविधता लेकर आए हैं, जिससे कूनो में चीतों की स्वस्थ और टिकाऊ आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों ने यह उम्मीद भी जताई है कि ये चीते कूनो के वातावरण में तेजी से घुलमिल जाएंगे।

अधिकारी ने बताया कि पृथकवास और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ चीतों को गांधी सागर और नौरादेही अभयारण्यों में स्थानांतरित करने की तैयारी भी की जा रही है।

भाषा दिमो मनीषा वैभव

वैभव


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