देखिए चंदेरी विधानसभा सीट के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड
देखिए चंदेरी विधानसभा सीट के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड
अशोकनगर। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज बारी है मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में आने वाली चंदेरी विधानसभा सीट की। चंदेरी विधानसभा सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है और गोपाल सिंह चौहान यहां से विधायक हैं। 2008 में अस्तित्व में आई चंदेरी विधानसभा सीट पर हुए पहले चुनाव में बीजेपी ने परचम लहराया था, जबकि कांग्रेस ने पिछला चुनाव जीतकर बदला चुकता कर दिया। चंदेरी विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के दबदबे वाली सीट मानी जाती है। ऐसे में मिशन 2018 में दोनों सियासी दल ने एक–दूसरे पर बढ़त बनाने के लिए अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी है।
अशोकनगर जिले में आने वाली चंदेरी विधानसभा अपने प्राकृतिक और ऐहितासिक धरोहरों के लिए पूरे मध्यप्रदेश में मशहूर है। चंदेरी पर्यटन के क्षेत्र में तो सिरमौर है ही, यहां की बनी चंदेरी साड़ी ने भी देश-दुनिया में चंदेरी का नाम रोशन किया है। यहां के सियासी समीकरण की बात की जाए तो 2008 में अस्तित्व में आई इस विधानसभा सीट में एक बार बीजेपी तो एक बार कांग्रेस के प्रत्याशी ने बाजी मारी। यानी चंदेरी विधानसभा क्षेत्र की जनता पार्टी से ज्यादा प्रत्याशी को अहमियत देती है। 2008 में यहां हुए पहले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राव राजकुमार सिंह ने कांग्रेस के गोपाल सिंह चौहान को हराया और विधानसभा पहुंचे। 2013 के चुनाव में भी दोनों पार्टियों ने अपने पुराने प्रत्याशियों को ही मौका दिया। इस बार बाजी मारी कांग्रेस के गोपाल सिंह चौहान ने।
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अब जब चुनावी साल है तो चंदेरी में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चली है। दोनों दल अपनी रणनीति के तहत चुनावी तैयारियों में जुट गए है। भले ही सीट पर कांग्रेस का कब्जा हो लेकिन बीजेपी के नेताओँ को भरोसा है कि राज्य सरकार ने चंदेरी के विकास में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ी है और आगामी चुनाव में यहां कमल खिलेगा। वहीं कांग्रेस का दावा है कि इस बार भी चंदेरी में पंजा का कब्जा होगा। कुल मिलाकर चंदेरी में दोनों सियासी पार्टियों के अपने-अपने दावे हैं। लेकिन जनता के मन में इस बार क्या खिचड़ी पक रहा है वो कुछ महीनों बाद ही साफ हो पाएगा। वैसे सियासी समीकरण बताते हैं कि 2018 का सियासी महासंग्राम यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है।
चंदेरी विधानसभा में मुद्दों की बात की जाए तो यहां विकास के मूलभूत सुविधाओँ के नाम पर ही चुनाव लड़ा जाता रहा है। लेकिन आज भी यहां की जनता शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली पानी के लिए तरस रही है। बुनकरों की पहचान रखने वाले चंदेरी में साड़ी बुनकरों के जीवन स्तर में भी अब तक कोई सुधार नहीं हो पाया है। चंदेरी की साड़ियां आज अगर पूरे देश में मशहूर है तो उसमें इन बुनकरों का अहम योगदान है, जिनकी पीढ़ी दर पीढ़ी इस काम में लगी है। चंदेरी विधानसभा में पिछले 10 सालों में सियासी समीकरण तो जरूर बदले। लेकिन हैंडलूम के सहारे साड़ी बुनते-बुनते पूरी जिंदगी गुजारने वाले इन बुनकरों की जिंदगी नहीं बदली। चंदेरी में आधुनिक बुनकर पार्क की सौगात तो मिली। लेकिन यहां के बुनकरों को साड़ी के बदले सिर्फ मजदूरी ही मिलती है और आज भी यहां के बुनकर साहूकारों के यहां मजदूरी करने को मजबूर हैं।
चंदेरी विधानसभा क्षेत्र में विकास के हाल भी बुनकरों जैसे ही है। विधानसभा का 80 फीसदी इलाका ग्रामीण बाहुल्य है, जहां रहने वाले लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते नजर आते हैं। उच्च शिक्षा के लिए विधानसभा में संसाधन ही नहीं हैं और जो पढ़े-लिखे युवा हैं वो भी रोजगार के अभाव में भटकने को मजबूर हैं। दूर अंचल के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा सड़क और बिजली का भी अभाव है। चुनावी साल है तो इन मुद्दों को लेकर राजनीति भी पूरे चरम पर है। विधायक दलील दे रहे हैं कि क्षेत्र में विकास में अडंगा लगने के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस विधायक की नाकामी बताती हैं। कुल मिलाकर चंदेरी की सियासत में आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में ये और तेज होगा। लेकिन ये भी तय है कि चंदेरी में आने वाले चुनाव में सियासत की जंग मुद्दों के हथियारों से ही लड़ी जाएगी।
चंदेरी विधानसभा में विकास के मुददे पर बीजेपी-कांग्रेस में रार छिड़ी है। चुनावी मैदान में दोनों पार्टियां एक दूसरे की गलतियों को गिनाने में लगी हैं। आगामी विधानसभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों में ही टिकट के दावेदारों की लंबी लिस्ट पार्टी हाईकमान को मिली है टिकट की दावेदारी को लेकर दोनों दलों में टकराव की स्थिति भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है। दोनों ही पार्टियों में 3-4 बड़े नेता खुले तौर पर अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। ऐसे में पार्टी आलाकमान के सामने चुनौती है कि वो इस बार सही उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारे।
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चंदेरी में इस बार कमल खिलेगा या फिर पंजा का कब्जा होगा। इन दिनों ये सवाल चंदेरी के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसी सियासी गहमागहमी के बीच बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के नेता टिकट के लिए सक्रिय हो गए हैं। दोनों ही दलों में टिकट की दावेदारी को लेकर मारामारी की स्थिति है और नेता इस तरह सक्रिय हो गए हैं, जैसे उन्हें अपने दल से बी-फॉर्म मिल गया हो। बीजेपी की बात की जाए तो पार्टी में आधा दर्जन से ज्यादा नेता चंदेरी से दावेदारी कर रहे हैं। इसमें पिछली बार चुनाव हारे पूर्व विधायक राजकुमार सिंह का नाम सबसे आगे है। राजकुमार तीसरी बार टिकट की मांग कर रहे हैं। दावेदारों की लिस्ट में पूर्व विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी का नाम भी शामिल है। उनका दावा है कि पार्टी इस बार उन्हें ही टिकट देगी। वहीं अशोकनगर के पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष नीरज मनोरिया भी टिकट के संभावित उम्मीदवार हैं।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की बात करें तो आधा दर्जन नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। दावेदारों में पहला नाम वर्तमान विधायक गोपाल सिंह चौहान का आता है। कांग्रेस लगातार दो बार से गोपालसिंह चौहान को टिकट देती आई है। इसके अलावा ईसागढ़ नगर परिषद अध्यक्ष भूपेंद्र द्विवेदी भी प्रबल दावेदार हैं। कांग्रेस नेता महेंद्रपाल सिंह बुंदेला और विवेकांत भार्गव भी टिकट की रेस में हैं।
जाहिर दावेदारों की इस लंबी फेहरिस्त ने चंदेरी में बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं और गुटबाजी उसकी चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहंचा सकती है। उधर कांग्रेस में भी दावेदारों की लंबी कतार पार्टी हाईकमान के लिए सिरदर्द साबित हो रही है। जाहिर है टिकट के लिए दोनों दलों में धमासान मचने के साथ चुनाव में एंटी-इन्कमबेंसी भी देखने को मिल सकती है।
वेब डेस्क, IBC24

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