कांग्रेस की किताब.. बीजेपी मांगे जवाब! कांग्रेस की किताब पर बीजेपी को आपत्ति क्यों?
कांग्रेस की किताब.. बीजेपी मांगे जवाब! कांग्रेस की किताब पर बीजेपी को आपत्ति क्यों? Why does BJP object to Congress's book?
भोपाल। Why does BJP object to Congress’s book? मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस अतीत के पन्नों में संभावनाएं तलाश रही है। कमलनाथ ने इसे बाकायदा एक किताब की शक्ल दी है। इस पर बीजेपी ने कड़ा ऐतराज जताया है। आखिर इस किताब में ऐसा क्या है और बीजेपी को इस पर आपत्ति क्यों है।
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ये कथाकथित नेहरू कांग्रेस है। यह वह कांग्रेस नहीं है जो गांधी जी की थी। जो सरदार वल्लभ भाई पटेल की थी। जिन्होंने आजादी के लिए कुछ किया और आरएसएस जैसे देश भक्त संगठन जिन्होंने देश की एकता और अखंडता को कायम रखा है। ऐसे त्यागी और तपस्वी लोगों के खिलाफ बोलने की हैसियत और अधिकार नहीं है कांग्रेस की। तोड़ मरोड़कर इतिहास पेश करना कांग्रेस की आदत रही है।
मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग का ये बयान कांग्रेस की उस किताब को लेकर है, जिसमें आजादी के आंदोलन के दौरान संघ की भूमिका पर सवाल खड़े गए किए हैं। इस किताब का नाम है कांग्रेस और राष्ट्र निर्माण की गाथा। इस किताब को पीसीसी चीफ कमलनाथ ने तैयार करवाया है और इसे प्रदेश के नौजवानों तक पहुंचाने का पूरा खाका भी तैयार किया गया है। कांग्रेस की इस किताब में ऐसा क्या है, जिसकी वजह से बीजेपी को ऐतराज है। दरअसल इस किताब में लिखा है कि ‘मुस्लिम लीग के प्रमुख नेता मोहम्मद अली जिन्ना थे, जिनकी मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग ने भारत का विभाजन कराया और पाकिस्तान अस्तित्व में आया। मुस्लिम लीग ने कभी अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन नहीं किया, बल्कि समय-समय पर तारीफ की। इसी तरह का व्यवहार हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों का रहा। इसमें मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और हिंदू महासभा का नाम लिया जा सकता है। इन दोनों ही संगठनों के संयोग से पहले जन संघ और बार में भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ। आजकल भाजपा खुद को राष्ट्रवादी पार्टी कहती है। जबकि सच्चाई यह है कि जब आजादी की लड़ाई में राष्ट्रवाद दिखाने का सही समय था, तब इसके पूर्ववर्ती संगठन खामोश थे या आजादी की लड़ाई का विरोध कर रहे थे।’
इस किताब में छपे लफ्जों के तीर से मुकाबले के लिए बीजेपी ने भी तलवार खींच ली है। बीजेपी का दावा है कि शताब्दी के पांच काले पन्ने कांग्रेस के हैं, जिसमें काला अतीत दर्ज है। आंतकवाद है। अलगाववाद है। कांग्रेस का सच भी सबके सामने है..जो सोशल मीडिया पर अकसर लोगों के जरिए भी सामने आता रहता है। कहते हैं अंदरुनी चोट खुले घाव से ज्यादा घातक होती है। इसे सियासतदां भी बखूबी समझते हैं। इसलिए चुनावी जंग करीब आता देख अतीत के पन्नों से भविष्य की नींव गढ़ने की कोशिश शुरू हो चुकी है।


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