‘लाडकी बहिन’ योजना से 80 लाख महिलाएं बाहर, विपक्ष ने लगाया ‘वित्तीय संकट’ का आरोप

‘लाडकी बहिन’ योजना से 80 लाख महिलाएं बाहर, विपक्ष ने लगाया ‘वित्तीय संकट’ का आरोप

‘लाडकी बहिन’ योजना से 80 लाख महिलाएं बाहर, विपक्ष ने लगाया ‘वित्तीय संकट’ का आरोप
Modified Date: June 1, 2026 / 12:46 pm IST
Published Date: June 1, 2026 12:46 pm IST

मुंबई, एक जून (भाषा) मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना के लिए ऑनलाइन माध्यम से केवाईसी (उपभोक्ता को जानो) की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद 80 लाख महिलाएं इस योजना से बाहर हो गई हैं। इसे लेकर विपक्षी दलों ने तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार ‘‘गंभीर वित्तीय संकट’’ के कारण लाभार्थियों को योजना से बाहर कर रही है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि हालांकि, 30 अप्रैल की ‘ई-केवाईसी’ समयसीमा के बाद लाभार्थियों की संख्या 2.4 करोड़ से घटकर करीब 1.7 करोड़ रह गई है, लेकिन यह कटौती केवल ‘ई-केवाईसी’ न कराने के कारण नहीं, बल्कि पात्रता मानदंडों का पालन न करने से भी जुड़ी है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने लाभार्थियों को ई-केवाईसी पूरी करने के लिए आठ महीने का समय दिया था।

अधिकारी ने कहा, ‘‘करीब 50 से 55 लाख महिलाओं ने यह प्रक्रिया पूरी ही नहीं की, जबकि दो से तीन लाख ने इस दौरान अपनी त्रुटियां सुधारीं। इसके अलावा, करीब 12 लाख महिलाएं आयकर दाता पाई गईं, जो 2.5 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा से अधिक हैं और 4.5 लाख से अधिक महिलाएं 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर चुकी थीं।’’

उन्होंने यह भी बताया कि करीब पांच लाख महिलाएं पहले से नमो शेतकरी योजना का लाभ उठा रही हैं।

‘ई-केवाईसी’ पूरी करने के बावजूद मासिक किस्त न मिलने की शिकायतों पर अधिकारी ने कहा, ‘‘वास्तविक लाभार्थियों की अंतिम संख्या एक सप्ताह में स्पष्ट हो जाएगी और शिकायतों का पुन: सत्यापन किया जा रहा है।’’

उन्होंने यह भी खारिज किया कि 80 लाख महिलाओं को केवल ई-केवाईसी न कराने के आधार पर योजना से हटाया गया है।

वहीं, विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) नेता जयंत पाटिल ने दावा किया कि योजना से लाभार्थियों को हटाना राज्य के ‘‘गंभीर वित्तीय संकट’’ को दर्शाता है।

पाटिल ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के खराब प्रदर्शन के बाद विधानसभा चुनावों से पहले इस योजना को लागू किया गया था जिसके तहत महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता दी जाती है।

पाटिल ने कहा, ‘‘अब 80 लाख महिला लाभार्थियों को अपात्र घोषित कर दिया गया है। यह उन्हीं लोगों को धोखा देना है, जिन्हें सहायता का वादा किया गया था।’’

उन्होंने इसे राज्य सरकार पर बढ़ते वित्तीय बोझ का संकेत बताया और कहा, ‘‘केंद्र के बाद अब राज्य भी गंभीर वित्तीय संकट में है। पहली मार हमारी ‘लाडकी बहिनों’ पर पड़ी है। राज्य का राजकोषीय घाटा काफी अधिक है और वैश्विक आर्थिक मंदी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।’’

राकांपा (शप) विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लाडकी बहिन योजना को धीरे-धीरे बंद करने के इरादे से लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से हटा रही है।

पवार ने एक बयान में दावा किया कि विधानसभा चुनावों से पहले योजना में 2.47 करोड़ लाभार्थी थीं, जबकि अब करीब 81 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘केवाईसी तो बस एक बहाना है। असली मकसद लाभार्थियों को अलग-अलग चरणों में हटाकर योजना को बंद करना है।’’

साथ ही उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि महिला लाभार्थियों से धनराशि वापस लेने या उन्हें परेशान करने की कोशिश की गई तो कड़ा विरोध होगा।

भाषा

खारी मनीषा

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