अमरावती, 24 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के अमरावती के एक सरकारी अस्पताल में स्वप्निल बारगे ने अपने परिजनों को फोन कर बेटा होने की खुशखबरी सुनायी थी। लेकिन चंद घंटे बाद ही वह बदहवास हालत में अपनी पत्नी और एक दिन के बेटे की तलाश में अस्पताल के गलियारों में भटक रहे थे।
बाद में उन्हें पता चला कि उनका नवजात बेटा उन तीन शिशुओं में शामिल था जिनकी नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में आग लगने से मौत हो गई।
सोमवार सुबह बारगे की तलाश तब खत्म हुई जब उन्हें खबर मिली कि समय से पहले जन्मा उनका बेटा आग की चपेट में आकर मारा गया।
अस्पताल की एनआईसीयू में तड़के एक वेंटिलेटर में आग लगने के बाद तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई।
पुलगांव निवासी बारगे ने बताया कि सुबह करीब 3.30 बजे तक सरकारी महिला अस्पताल की एनआईसीयू में धुआं और अफरा-तफरी फैल गई और खुशी चंद पलों में मातम में बदल गई।
उन्होंने रोते हुए कहा, “मैं अपने बच्चे और पत्नी को तलाशता रहा। मैंने बहुत खोजा लेकिन आग लगने के बाद अपने बेटे को नहीं ढूंढ सका। सुबह पता चला कि उसकी मौत हो गई है।”
बारगे ने बताया कि उनकी पत्नी ने रविवार को एक अन्य अस्पताल में समय से पहले और कम वजन वाले बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे को एनआईसीयू में भर्ती करने की जरूरत होने के कारण मां और नवजात दोनों को जिला महिला अस्पताल भेजा गया था।
उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश था क्योंकि मेरे बेटा हुआ था। मैंने परिवार को फोन करके यह खुशखबरी दी थी। मैं सो नहीं सका और सुबह तीन बजे तक जागता रहा।”
कुछ ही घंटों में उनकी खुशी मातम में बदल गई।
उन्होंने कहा, “करीब 3.30 बजे मैं एक दोस्त के साथ अस्पताल के गेट पर खड़ा था, तभी एक महिला के चिल्लाने की आवाज सुनी लेकिन हमें कुछ नहीं बताया गया। फिर अफरा-तफरी मच गई और दमकल की गाड़ियां पहुंचीं। मैं अपने बच्चे और पत्नी को तलाशता रहा लेकिन उन्हें नहीं ढूंढ सका।”
बारगे को सुबह करीब साढ़े सात बजे अपने नवजात बेटे की मौत की जानकारी मिली। वह रोते हुए कहे जा रहे थे कि अब वह अपने बेटे को कभी गोद में नहीं ले पाएंगे, उसके साथ खेल नहीं पाएंगे और उसे बड़ा होते नहीं देख पाएंगे।
भाषा
राखी नरेश
नरेश