आंध्र प्रदेश : सीआईडी ने एपीएसएसडीसी घोटाला मामले में दी मुख्यमंत्री नायडू को क्लीनचिट

आंध्र प्रदेश : सीआईडी ने एपीएसएसडीसी घोटाला मामले में दी मुख्यमंत्री नायडू को क्लीनचिट

आंध्र प्रदेश : सीआईडी ने एपीएसएसडीसी घोटाला मामले में दी मुख्यमंत्री नायडू को क्लीनचिट
Modified Date: January 13, 2026 / 06:57 pm IST
Published Date: January 13, 2026 6:57 pm IST

(फाइल फोटो)

अमरावती, 13 जनवरी (भाषा) विजयवाड़ा की एक अदालत ने आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम (एपीएसएसडीसी) की धनराशि की हेराफेरी में कथित संलिप्तता को लेकर मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के विरूद्ध दर्ज किये गये मामले को बंद कर दिया है।

आरोप है कि इस हेराफेरी के कारण राज्य के खजाने को 300 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था।

 ⁠

इस मामले में नायडू ने राजामहेंद्रवरम केंद्रीय जेल में 50 दिनों से अधिक समय बिताया था, जिसके बाद आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 31 अक्टूबर, 2023 को उन्हें जमानत दे दी थी।

आंध्र प्रदेश के महाधिवक्ता दम्मलपति श्रीनिवास ने कहा कि जांच एजेंसी सीआईडी (अपराध जांच विभाग) ने मुख्यमंत्री की कोई संलिप्तता नहीं पाई और तदनुसार अदालत के समक्ष एक ‘मेमो’ दाखिल किया गया, जिसे न्यायिक अधिकारी ने स्वीकार कर लिया।

श्रीनिवास ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘जांच पूरी होने के बाद, एजेंसी ने यह कहते हुए मामले को बंद करने के लिये एक रिपोर्ट दाखिल की कि नायडू की भूमिका के संबंध में मामले में कोई ठोस सबूत नहीं है। अदालत ने सोमवार को इसे स्वीकार कर लिया।’’

नायडू को इस मामले में नौ सितंबर, 2023 को गिरफ्तार किया गया था, जब वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी राज्य के मुख्यमंत्री थे।

नायडू की गिरफ्तारी के बाद, तत्कालीन सीआईडी ​​प्रमुख एन संजय ने कहा था कि जांच में सामने आया है कि नायडू और उनकी तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) को पैसे की कथित हेराफेरी से लाभ पहुंचा ।

आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम का मामला उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई) के समूह स्थापित करने से संबंधित है, जिसकी कुल परियोजना लागत 3,300 करोड़ रुपये अनुमानित थी।

संजय ने कहा था कि लेकिन इससे राज्य सरकार को कथित तौर पर 300 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा था कि परियोजना से संबंद्ध निजी संस्थाएं कोई भी पैसा खर्च करती, उससे पहले ही राज्य सरकार ने 371 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान जारी किया, जो उसकी वित्तीय प्रतिबद्धता का 10 प्रतिशत था।

संजय के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा जारी की गई धनराशि फर्जी बिल के माध्यम से फर्जी कंपनियों को अंतरित कर दी गयी, जबकि उल्लेखित वस्तुओं की कोई वास्तविक आपूर्ति या बिक्री ही नहीं हुई । बताया जाता है कि इनमें से कुछ फर्जी कंपनियां सिंगापुर में स्थित थीं।

संजय ने दावा किया था कि गवाहों और अन्य आरोपियों पर नायडू का प्रभाव रिकॉर्ड पर आ चुका है, जिससे उनकी स्थिति को देखते हुए उनकी गिरफ्तारी आवश्यक हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री जांच में बाधा डालने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं।

नायडू के मुख्यमंत्री बनने के बाद, संजय को इस मामले से संबंधित सार्वजनिक धन के गबन और दुरुपयोग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

इस बीच, वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के. कन्नाबाबू ने तेदेपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार पर नायडू के खिलाफ दर्ज मामलों को ‘जांच एजेंसियों को प्रभावित कर व्यवस्थित रूप से बंद करने’ का आरोप लगाया।

भाषा

राजकुमार दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में