अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, कहा: मंत्री का इस्तीफा एक मजबूत संदेश देगा

अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, कहा: मंत्री का इस्तीफा एक मजबूत संदेश देगा

अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, कहा: मंत्री का इस्तीफा एक मजबूत संदेश देगा
Modified Date: July 22, 2026 / 07:56 pm IST
Published Date: July 22, 2026 7:56 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

मुंबई, 22 जुलाई (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि दिल्ली में विद्यार्थियों के मौजूदा प्रदर्शन के दौरान हिंसा एवं पुलिस कार्रवाई ‘बहुत दुखद’ है तथा लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर होता है।

हजारे ने पत्र में यह भी कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार कमजोर नहीं होगी, बल्कि इससे दूसरे मंत्रियों को जवाबदेही के बारे में एक मज़बूत संदेश जाएगा और शासन में सुधार आयेगा।

हजारे का यह पत्र ऐसे समय में आया है जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) और कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां नीट (मेडिकल प्रवेश) परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं।

उन्होंने चिट्ठी में कहा, ‘‘अगर जवाबदेही तय की जाए और किसी मंत्री का इस्तीफा लिया जाए, तो सरकार सत्ता नहीं गंवायेगी। बल्कि, इससे दूसरे मंत्रियों को एक साफ संदेश जाएगा कि अगर वे अपने विभागों की जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभाते हैं, तो उन्हें भी अपने पद छोड़ने पड़ सकते हैं। इससे सरकार का कामकाज ज़्यादा जवाबदेह और असरदार बनेगा।’’

उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिंसा एवं पुलिस कार्रवाई को दुखद बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर स्थिति में हिंसा, सरकारी संपत्तियों को नुकसान तथा अत्यधिक बल प्रयोग से बचा जाना चाहिए।

गांधीवादी विचारक ने कहा कि देश के लाखों युवा परीक्षा के पेपर लीक होने, भर्ती प्रक्रिया में देरी और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को लेकर चिंतित हैं तथा इन चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था के मामले के तौर पर नहीं, बल्कि जनता के आक्रोश की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।

हजारे का यह भी कहना था कि जब भी कोई गड़बड़ी या घोटाला सामने आता था, तो अक्सर जिम्मेदारी सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों पर डाली जाती है, जबकि अच्छे नतीजों का श्रेय सरकार ले लेती है। उन्होंने कहा कि असल ज़िम्मेदारी तो ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की होती है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि लोकतंत्र में टकराव के बजाय बातचीत हमेशा बेहतर होती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वह जनता की आवाज़ को राजनीतिक विरोधियों की आवाज न समझें।

भाषा

राजकुमार रंजन

रंजन


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