अनुपम खेर, शबाना आजमी ने मशहूर रंगकर्मी विजया मेहता को श्रद्धांजलि दी

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अनुपम खेर, शबाना आजमी ने मशहूर रंगकर्मी विजया मेहता को श्रद्धांजलि दी

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  • Publish Date - July 1, 2026 / 02:45 PM IST,
    Updated On - July 1, 2026 / 02:45 PM IST

मुंबई, एक जुलाई (भाषा) अभिनेता अनुपम खेर और अभिनेत्री शबाना आजमी ने बुधवार को मशहूर रंगकर्मी एवं रंगमंच निर्देशक तथा अभिनेत्री विजया मेहता को एक दूरदर्शी कलाकार के रूप में याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय रंगमंच को नया रूप दिया और कलाकारों, निर्देशकों तथा कथाकारों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।

मेहता को प्यार से लोग ‘‘बाई’’ कहकर बुलाते थे। उनका मंगलवार रात को दक्षिण मुंबई स्थित उनके घर पर उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह 92 साल की थीं।

मेहता के साथ उनकी चर्चित फिल्मों ‘राव साहेब’ (1986) और ‘पेस्टनजी’ (1988) में काम कर चुके खेर ने उन्हें ‘‘भारत की अब तक की सबसे बेहतरीन रंगमंच प्रतिभाओं में से एक’’ बताया।

उन्होंने ‘इंस्टाग्राम’ पर लिखा, ‘‘विजया मेहता – एक महान हस्ती! विजया मेहता के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। वह भारत की सबसे बेहतरीन रंगमंच हस्तियों में से एक थीं जो एक शानदार फिल्मकार और सबसे बढ़कर, एक बेहतरीन इंसान थीं।’’

अभिनेता ने कहा कि मेहता के साथ काम करना उनके लिए एक बदलाव लाने वाला अनुभव था।

उन्होंने लिखा, ‘‘मुझे ‘राव साहेब’ और ‘पेस्टनजी’ में विजया बाई के साथ काम करने का सौभाग्य मिला। मैं तब तक कुछ फिल्में कर चुका था और सोचता था कि अभिनय को समझता हूं। लेकिन उनके साथ हर रिहर्सल मुझे याद दिलाता था कि इस कला का सागर कितना अथाह है।’’

खेर ने कहा कि मानव व्यवहार की गहरी समझ होने के बावजूद मेहता कभी भी अपना ज्ञान दूसरों पर थोपती नहीं थीं।

उन्होंने लिखा, ‘‘उनका अनुशासन शालीनता में, उनकी आत्मीयता विनम्रता में और उनकी प्रतिभा सादगी में लिपटी हुई थी।’’

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘मृत्यु की सबसे क्रूर बात यह है कि खबर सुनते ही हमें किसी प्रिय व्यक्ति के बारे में भूतकाल में बात करनी पड़ती है, जबकि दिल को इसे स्वीकार करने में समय लगता है।’’

अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा कि मेहता ने अपनी निडर रचनात्मकता और कलात्मक दृष्टि से भारतीय रंगमंच को नए रूप में परिभाषित किया।

उन्होंने ‘इंस्टाग्राम’ पर लिखा, ‘‘जब आप ऐसे कलाकारों की बात करते हैं जो केवल अभिनय नहीं करते बल्कि वे कला के स्वरूप को ही बदल देते हैं तो जिनका नाम हमारे दिमाग में सबसे पहले आता है वह हैं विजया मेहता। वह एक दूरदर्शी थीं, जिन्होंने अपनी जिज्ञासा और निर्भीक रचनात्मकता के साथ भारतीय रंगमंच को बदल दिया और कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।’’

आजमी ने कहा कि उनका काम केवल रंगमंच तक सीमित नहीं था बल्कि वह सत्य, मानवता और कहानी कहने की असीम शक्ति के बारे में था।

विजया मेहता ने नाटककार विजय तेंदुलकर, अभिनेता डॉ. श्रीराम लागू और रंगकर्मी अरविंद देशपांडे के साथ मिलकर प्रभावशाली थिएटर समूह ‘‘रंगायन’’ की स्थापना की थी।

उन्होंने ‘एक शून्य बाजीराव’, ‘बैरिस्टर’, ‘हमीदाबाईची कोठी’, ‘पुरुष’, ‘महासागर’ और ‘शाकुंतल’ जैसे चर्चित नाटकों का निर्देशन किया, साथ ही ‘राव साहेब’ और ‘पेस्टनजी’ जैसी समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्मों का निर्देशन भी किया।

उनके परिवार में एक बेटी और दो बेटे हैं।

भाषा सुरभि वैभव

वैभव