आशा भोसले को अपने गीतों से ज्यादा खाने की तारीफ सुनना पसंद था: जावेद अख्तर
आशा भोसले को अपने गीतों से ज्यादा खाने की तारीफ सुनना पसंद था: जावेद अख्तर
(कोमल पंचमटिया)
मुंबई, 12 अप्रैल (भाषा) गीतकार जावेद अख्तर और उनकी पत्नी व अभिनेत्री शबाना आजमी के जेहन में कोविड-19 लॉकडाउन के समय दिग्गज गायिका आशा भोसले के साथ बिताई गईं यादें अब भी ताजा हैं, जिन्हें अपने गायन से ज्यादा खाने की तारीफ सुनना पसंद था।
रविवार को 92 वर्ष की उम्र में भोसला का निधन अख्तर और आजमी के लिए न सिर्फ एक सहयोगी] बल्कि एक करीबी दोस्त और बेहतरीन किस्सागो को खोना भी है।
कोविड-19 के दौरान, अख्तर और आजमी खंडाला में रह रहे थे, जबकि भोसले अपने परिवार के साथ पास में ही लोनावला में थीं। ये दोनों ही महाराष्ट्र के प्रसिद्ध हिल स्टेशन हैं।
अख्तर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, “खंडाला में मैंने यह महसूस किया कि आप उनके गीतों की कितनी भी तारीफ करें, उन्हें उतनी खुशी नहीं होती थी, लेकिन अगर आप कहें कि खाना बहुत अच्छा है। यह ‘कबाब’ या ‘दाल’ कमाल की बनी है। तो आशा जी को सबसे ज्यादा खुशी होती थी। यही उन्हें सबसे ज्यादा संतोष देता था।”
उन्होंने बताया कि भोसले लजीज खाना बनाती थीं और वे अक्सर उनके घर खाना खाने जाते थे या फिर वह उनके घर आ जाया करती थीं।
अख्तर ने कहा, “मैंने ‘पुरण पोली’ खाई है, लेकिन उन्हें अपने बनाए कबाब बेहद पसंद थे। वह खुद खाना बनाती थीं और बहुत अच्छा बनाती थीं। वैसा स्वाद कहीं और नहीं मिलता।”
शबाना आजमी (75) ने कहा, “कोविड के दौरान हम बहुत करीब आ गए थे क्योंकि हम खंडाला में फंसे हुए थे और वह अपने परिवार के साथ लोनावला में थीं। वह हमारे लिए बेहद स्वादिष्ट खाना बनाती थीं और जावेद तथा उनके बीच फिल्म जगत के कई मज़ेदार किस्से सुनने को मिलते थे। उनकी याददाश्त कमाल की थी और वह बहुत बेबाक भी थीं।”
भोसले के साथ ‘‘सागर’’ फिल्म के ‘जाने दो न’, ‘‘लगान’’ के “राधा कैसे न जले” जैसे मशहूर गीत देने वाले अख्तर ने भोसले को एक “जिंदादिल इंसान” बताया।
अख्तर के अनुसार, “शरारत, मस्ती और ऊर्जा” उनकी गायकी में साफ झलकती थी।
उन्होंने कहा, “जब आप उनकी आवाज़ सुनते हैं, तो उसमें युवापन, एक तरह की आकर्षक और मोहक गुणवत्ता महसूस होती है।”
उन्होंने कहा, “वह एक बेहतरीन किस्सागो थीं और उनका हास्यबोध काफी चुलबुला था।”
भाषा जोहेब सुभाष
सुभाष

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