अद्वितीय प्रतिभा से पार्श्व गायन में अलग मुकाम हासिल करने वाली आशा भोसले का निधन
अद्वितीय प्रतिभा से पार्श्व गायन में अलग मुकाम हासिल करने वाली आशा भोसले का निधन
(फाइल फोटो के साथ)
मुंबई, 12 अप्रैल (भाषा) अपनी अनूठी आवाज से हिंदी पार्श्व गायन में अलग मुकाम हासिल करने वाली दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं।
उन्होंने अपनी बहन तथा महान गायिका लता मंगेशकर की छाया में रहकर अपनी अलग पहचान बनाई थी।
भोसले को शनिवार शाम सीने में संक्रमण और कमजोरी के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी पोती जनाई भोसले ने यह जानकारी दी थी।
आशा का विवाह 16 वर्ष की आयु में 1949 में गणपतराव भोसले से हुआ था और बाद में उन्होंने अपने सहयोगी एवं संगीतकार आर डी बर्मन से विवाह किया। उनके परिवार में बेटे आनंद और पोते-पोतियां हैं।
उनके बेटे आनंद ने बताया कि अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘लोग कल पूर्वाह्न 11 बजे लोअर परेल स्थित कासा ग्रांडे में उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकते हैं, जहां वह रहती थीं। उनका अंतिम संस्कार कल शाम चार बजे शिवाजी पार्क में किया जाएगा।’’
आशा ने ‘‘चैन से हम को कभी’’ में खोए हुए प्यार का शोक मनाने के साथ ही ‘‘आजा, आजा’’ पर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया था और उनकी बहन लता ने सात दशकों तक हिंदी पार्श्व गायन की दुनिया पर राज किया। बॉलीवुड में महिला मुख्य किरदारों के लिए रिकॉर्ड किए गए लगभग हर फिल्मी गाने में मंगेशकर बहनों की आवाज होती थी।
लता मंगेशकर का फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में निधन हुआ था।
आठ दशकों से अधिक लंबे करियर में आशा ने अविश्वसनीय रूप से 12,000 गाने रिकॉर्ड किए। उनका पहला गाना 1943 में 10 वर्ष की आयु में मराठी फिल्म ‘‘माझा बल’’ के लिए था। उन्होंने 2010 के दशक के अंत तक और उसके बाद भी गायन जारी रखा, जिससे वह वैश्विक संगीत इतिहास में सबसे लंबे समय तक गायन करने वाली गायिका बन गईं।
आशा भोसले की आवाज 80 वर्ष की उम्र में भी स्थिर और ताज़गी भरी बनी रही।
लता मंगेशकर गीतों को आवाज देने के लिए संगीतकार मदन मोहन की पहली पसंद थीं, जिन्हें मधुर संगीत और ग़ज़लों का उस्ताद माना जाता है, वहीं आशा भोसले भी इस शैली में उतनी ही निपुण थीं। फिल्म ‘उमराव जान’ की उनकी ग़ज़लें आज भी याद की जाती हैं, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।
हालांकि, उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई – पहले संगीतकार ओ पी नय्यर के साथ उनके लयबद्ध और थिरकने पर मजबूर करने वाले गीतों में, और बाद में आर डी बर्मन के साथ कैबरे, रोमांस, विरह और हर तरह के भावनात्मक गीतों में अपनी खास छाप छोड़ी।
भोसले के लोकप्रिय गीतों में ‘अभी न जाओ छोड़ कर’, ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘दिल चीज क्या है’, ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दुनिया में लोगों को’ और ‘जरा सा झूम लूं मैं’ जैसे गाने शामिल हैं।
उन्होंने पद्मिनी एवं वैजयंतीमाला जैसी दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों से लेकर मीना कुमारी, मधुबाला, जीनत अमान, काजोल और उर्मिला मातोंडकर सहित कई प्रमुख अभिनेत्रियों को अपनी आवाज दी।
आशा ने 2023 में अपने जन्मदिन के उपलक्ष्य में दुबई में आयोजित एक विशेष संगीत कार्यक्रम ‘आशा90: लाइव इन कॉन्सर्ट’ में प्रस्तुति दी थी।
आठ सितंबर 1935 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोसले को अपनी बहन की तरह ही उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर ने संगीत की शिक्षा दी थी। संगीत मानो उनकी नियति में ही था। चार बहनों में लता, ऊषा और आशा पार्श्व गायिका बनीं जबकि मीना संगीतकार हैं। उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर भी संगीतकार हैं।
कई पुरस्कारों से सम्मानित आशा भोसले एक सफल उद्यमी भी थीं। उन्होंने दुबई और ब्रिटेन में ‘आशा’ नाम से लोकप्रिय रेस्तरां संचालित किया। उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई अन्य संगीत सम्मानों से नवाजा गया।
भाषा गोला नेत्रपाल
नेत्रपाल

Facebook


