आशा भोसले का संगीत इस धरती से कभी नहीं मिटेगा: शंकर महादेवन
आशा भोसले का संगीत इस धरती से कभी नहीं मिटेगा: शंकर महादेवन
मुंबई, 12 अप्रैल (भाषा) गायक एवं संगीतकार शंकर महादेवन ने रविवार को जानी-मानी पार्श्व गायिका आशा भोसले को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को भारतीय संगीत जगत के लिए बेहद दुखद दिन बताया।
आशा भोसले (92) का रविवार को दक्षिण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।
उन्होंने एक वीडियो बयान में कहा, “मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा कि हमारी प्यारी आशा ताई अब हमारे बीच नहीं हैं। एक संगीतकार के रूप में, दीदी के प्रशंसक के रूप में, एक करीबी पारिवारिक मित्र के रूप में और उन्हें देवी सरस्वती के समान मानने वाले के रूप में, मैं अपने दुख और भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पा रहा हूं। मुझे यकीन है कि हर भारतीय का दिल टूट गया है।”
महादेवन ने कहा कि वर्षों से उनका भोसले के साथ घनिष्ठ व्यक्तिगत और पेशेवर रिश्ता रहा है। उन्होंने कहा, “दीदी और उनका संगीत इस धरती से कभी नहीं मिटेगा, जब तक मनुष्य अस्तित्व में हैं, क्योंकि इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।’’
उन्होंने कहा, “वह एक ऐसी शख्सियत हैं, जो हमेशा जीवित रहेंगी, हमारे फोन पर, टेलीविजन पर, संगीत के हर माध्यम में मौजूद रहेंगी। वह हमारे साथ रहेंगी, उनकी अद्भुत आवाज पूरी दुनिया में गूंजती रहेगी।”
गायक एवं संगीतकार लेस्ली लुईस ने आशा भोसले को ‘संगीत की परी’ कहकर याद किया। लेस्ली लुईस ने 1990 के दशक में दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले के साथ मिलकर कुछ सबसे लोकप्रिय इंडिपॉप गाने बनाए थे।
लुईस ने एक बयान में कहा, ‘उनकी आवाज अमर है… वह हमेशा हमें एक नन्हे बच्चे जैसी चंचलता और शरारत भरी निगाहों से देखती थीं। वह हमेशा ऐसी ही रहेंगी। उन्हें कभी भी अतीत में नहीं याद किया जा सकता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आशा जी सिर्फ एक आवाज नहीं थीं। वह चंचलता थीं। वह हर वो भावना थीं, जो एक गाना व्यक्त कर सकता है और सबसे अद्भुत बात… उन्होंने इसे सहजता से कर दिखाया।’’
प्रख्यात शास्त्रीय गायक राहुल देशपांडे ने आशा भोसले के निधन को संगीत जगत के लिए एक अपार क्षति बताया।
देशपांडे ने कहा, ‘‘आशा भोसले का निधन संगीत जगत के लिए एक अपार क्षति है। यह एक अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। हम गायक आशाताई के बहुत ऋणी हैं। चाहे वह नाट्यसंगीत हो, फिल्मी गीत हों, भक्ति संगीत हो या कैबरे, उन्होंने गायक के प्रदर्शन का सर्वोच्च मानदंड स्थापित किया।’
देशपांडे ने कहा, ‘‘मुझे उनसे पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य मिला, जो मानो उनका आशीर्वाद प्राप्त करने जैसा था। मेरे दादाजी से नाट्यसंगीत सीखने के लिए उनके घर आने की स्मृति मैं हमेशा संजो कर रखूंगा।’’
देशपांडे मराठी नाट्य संगीत के उस्ताद पंडित वसंतराव देशपांडे के पोते हैं।
वहीं गायिका उषा उथुप ने आशा भोसले को ‘‘अद्भुत बहुमुखी गायिका’’ के रूप में याद किया। उथुप ने कहा, ‘‘आशा जी के बारे में भूतकाल में बात करना मुश्किल है।’’
उथुप ने कहा, ‘‘मेरी ओर से उनके साथ हमेशा से ही प्रशंसा और सम्मान का रिश्ता रहा है। वह सचमुच एक महान गायिका थीं; उनके जैसी बहुमुखी प्रतिभा वाली गायिका कोई और नहीं हुई। उन्हें इतने विविध प्रकार के गीत गाने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ, जिससे युवा गायकों की कई पीढ़ियां प्रेरित हुईं।’’
गायिका हैमंती शुक्ला ने भोसले के साथ अपने अनुभवों को याद करते हुए कहा, ‘आशा जी ने कुछ शास्त्रीय गीत अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर से भी बेहतर गाए।’
गायक मनोमय भट्टाचार्य ने याद किया कि आशा भोसले ने कोलकाता में रवींद्रनाथ टैगोर का एक गीत रिकॉर्ड किया था। भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘उन्होंने उच्चारण और गायिकी को बरकरार रखते हुए कई रवींद्र संगीत अद्भुत ढंग से गाए। वह एक बहुमुखी गायिका थीं, जिन्होंने दशकों तक शास्त्रीय, आधुनिक और कैबरे की शैलियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।’
एक अन्य बांग्ला गायक रूपांकर बागची ने कहा कि भोंसले ‘अपने गीतों के माध्यम से हमेशा जीवित रहेंगी’’।
फिल्मकार राम गोपाल वर्मा ने कहा कि आशा जी में शास्त्रीय परंपराओं को समकालीन संगीत के साथ मिलाने की एक अनूठी प्रतिभा थी। उनकी दो फिल्मों ‘रंगीला’ और ‘कंपनी’ में आशा भोसले ने गाने गाये थे।
वर्मा ने कहा कि भोसले उनकी पसंदीदा गायिका थीं और उन्हें ‘एक पूरे युग की धड़कन’ बताया।
वर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए आशा भोसले के साथ अपनी बाद की फिल्मों, जैसे 1997 की कॉमेडी ‘दौड़’ और 2002 की एक्शन थ्रिलर ‘कंपनी’ में काम करने की यादें ताजा करते हुए कहा, ‘वह मेरी सबसे पसंदीदा गायिका थीं।’
भाषा
अमित सुरेश
सुरेश

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