बकासुर की पार्टी बन गई है भाजपा, उसकी भूख कभी शांत नहीं होती: संजय राउत

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बकासुर की पार्टी बन गई है भाजपा, उसकी भूख कभी शांत नहीं होती: संजय राउत

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  • Publish Date - April 25, 2026 / 08:11 PM IST,
    Updated On - April 25, 2026 / 08:11 PM IST

मुंबई, 25 अप्रैल (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सदस्यों के पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय की घोषणा करने के एक दिन बाद, शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने शनिवार को भाजपा की तुलना पौराणिक कथाओं में वर्णित राक्षस बकासुर से की, जिसकी भूख कभी तृप्त नहीं होती।

राउत ने यहां पत्रकारों से कहा कि आम आदमी पार्टी के जो सांसद अपनी निष्ठा बदलकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए वे “पेज 3 नेता” हैं। उन्होंने दावा किया कि वे डरे हुए थे क्योंकि वे “धनी हैं और उन्हें सुरक्षा की जरूरत थी”।

राउत ने कहा, ‘‘अन्य पार्टियों का कचरा भाजपा को ही जाने दो, ताकि वह कूड़े का ढेर बन जाए।’’

आम आदमी पार्टी को शुक्रवार को तब बड़ा झटका लगा जब उसके 10 राज्यसभा सदस्यों में से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक समेत सात ने पार्टी छोड़ दी। चड्ढा ने कहा कि उन सभी ने भाजपा में विलय कर लिया है।

राउत ने कहा, “महाभारत में बकासुर नाम का एक राक्षस था जिसकी भूख कभी शांत नहीं होती थी। भाजपा बकासुर की पार्टी बन गई है। यह कुछ भी खा सकती है।”

राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा कि चड्ढा ने एक बार भाजपा को गुंडों की पार्टी कहा था, जबकि राज्यसभा में (चड्ढा की जगह) आम आदमी पार्टी के उपनेता बनने के तुरंत बाद मित्तल के व्यवसायों पर छापे मारे गए थे।

प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले सप्ताह फेमा जांच के तहत पंजाब में मित्तल से जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर छापे मारे थे।

राउत ने कहा, ‘‘भाजपा की राजनीति के बारे में सभी जानते हैं। यह बेशर्मी है।’’ शिवसेना (उबाठा) नेता राउत ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को नरक कहा था और भाजपा दिखा रही है कि नरक कैसा दिखता है।

राउत ने कहा कि उन्होंने स्वयं तत्कालीन उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर कहा था कि उन पर भाजपा में शामिल होने का दबाव है, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं किया और जेल जाना पसंद किया। राउत ने 2022 में कथित धनशोधन मामले में अपनी गिरफ्तारी का उल्लेख करते हुए यह बात कही। वह कुछ महीने बाद जमानत पर रिहा हो गए थे।

भाषा अमित प्रशांत

प्रशांत