ठाणे, 18 अप्रैल (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र और गोवा के सभी न्यायिक अधिकारियों को कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा कि वह अपने द्वारा पारित आदेश और फैसलों को उसी दिन केस इन्फॉर्मेशन सिस्टम (सीआईएस) सर्वर पर अपलोड करें। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी एक परिपत्र में उच्च न्यायालय ने चेतावनी दी है कि तय समयसीमा का पालन न करना गंभीर चूक माना जाएगा।
उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल स्वप्निल सी. खाती द्वारा जारी आदेश में कहा गया, “महाराष्ट्र और गोवा राज्य के सभी न्यायिक अधिकारी यह ध्यान रखें कि उनके द्वारा पारित आदेश और फैसले उसी दिन सीआईएस सर्वर पर अपलोड किए जाएं।”
इस निर्देश को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के माध्यम से सभी न्यायिक अधिकारियों तक पहुंचाया गया है। इसमें कहा गया है कि यदि किसी कारणवश फैसला उसी दिन अपलोड नहीं हो पाता है, तो संबंधित अधिकारी को देरी के कारणों का स्पष्ट विवरण देना होगा।
आदेश में कहा गया, “समय पर आदेश/फैसले अपलोड न करना न्यायिक अधिकारी की ईमानदारी से जुड़ा कदाचार है।”
कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारियों को अब हर महीने प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसमें यह पुष्टि करनी होगी कि उन्होंने अपने आदेश समय पर अपलोड किए हैं। प्रशासन ने गलत जानकारी देने के मामलों में कतई न बर्दाश्त करने की नीति भी लागू की है।
आदेश में कहा गया, “न्यायिक अधिकारियों को सूचित किया जाता है कि यदि उनके द्वारा दी गई जानकारी में कोई विसंगति पाई जाती है, तो उन्हें बिना विभागीय जांच के निलंबित किया जा सकता है।”
इसके अलावा, न्यायिक अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी मामले के निपटारे के बाद वे उससे संबंधित फाइल अपने पास न रखें।
यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुचारु बनाने और वादियों को अदालत के फैसलों तक तुरंत पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे निर्णय सुनाए जाने और उसके आधिकारिक रूप से उपलब्ध होने के बीच का अंतर कम किया जा सके।
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