मुंबई उच्च न्यायालय ने आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या के आरोप के फैसले को बरकरार रखा
मुंबई उच्च न्यायालय ने आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या के आरोप के फैसले को बरकरार रखा
मुंबई, आठ अप्रैल (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने 2014 में मुंबई के युवक एग्नेलो वाल्डारिस की कथित तौर पर हिरासत में मौत के मामले में आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का आरोप तय करने के अधीनस्थ अदालत के आदेश को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति ए एस गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चंदक की पीठ ने सोमवार को पारित एक आदेश में कहा कि वाल्डारिस की मौत से जुड़े हालात में पूरी सुनवाई होनी चाहिए।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि इस बात को लेकर ‘‘गंभीर विवाद’’ है कि उनकी मृत्यु हत्या थी या दुर्घटना।
अदालत ने आठ पुलिसकर्मियों द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने अधीनस्थ अदालत के सितंबर 2022 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 295-ए (किसी भी वर्ग के नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया गया कृत्य) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं – वरिष्ठ निरीक्षक जितेंद्र राठौड़, सहायक निरीक्षक अर्चना पुजारी, उप निरीक्षक शत्रुगन तोंडसे, हेड कांस्टेबल सुरेश माने और कांस्टेबल तुषार खैरनार, रविंद्र माने, विकास सूर्यवंशी और सत्यजीत कांबले – ने दावा किया था कि वाल्डारिस की मौत ट्रेन की चपेट में आने से उस वक्त हुई जब वह कथित तौर पर हिरासत से भाग रहा था।
वाल्डारिस और तीन अन्य लोगों को वडाला रेलवे पुलिस ने एक डकैती के मामले में हिरासत में लिया था।
पुलिस का दावा था कि वाल्डारिस की मौत हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान हुई, जबकि उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सह-हिरासत में लिए गए लोगों के बयानों और चिकित्सा साक्ष्यों के आधार पर हिरासत में यातना दिए जाने का उल्लेख किया।
भाषा तान्या सुरभि
सुरभि

Facebook


