मुंबई, 16 अप्रैल (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार इस भ्रम में है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के विपक्षी सांसद अपने-अपने राज्यों में चुनाव के कारण परिसीमन विधेयक पर मतदान के दौरान संसद नहीं आएंगे।
नयी दिल्ली में संवाददाताओं से बात करते हुए राउत ने कहा कि प्रमुख विपक्षी नेताओं जिनमें उनकी पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे शामिल हैं, को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राज्यसभा सदस्य ने कहा कि ठाकरे और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। इसलिए यह तय किया गया कि ठाकरे, बनर्जी से बात करेंगे ताकि उनकी पार्टी के सांसद संसद में उपस्थित रहें और विधेयक के खिलाफ मतदान करें।
उन्होंने बताया कि ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नयी दिल्ली में विपक्षी नेताओं की बैठक में शामिल हुए।
राउत ने कहा कि सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है, इसलिए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का विधेयक पारित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि यह ‘नारी शक्ति’ विधेयक नहीं बल्कि भाजपा का विधेयक है और विपक्ष इसे संसद में पारित नहीं होने देगा।
शिवसेना (उबाठा) नेता ने आरोप लगाया कि यह केंद्र की एक चाल है कि जब बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में चुनाव हो रहे हों, तब यह विधेयक लाया जाए ताकि तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और केरल के सांसद संसद सत्र में शामिल न हो सकें।
उन्होंने कहा, “सरकार भ्रम में है। तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और केरल के सभी सांसद संसद में मौजूद रहेंगे। हमने सभी सांसदों को एक साथ लाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इस विधेयक को पारित नहीं होने दिया जाएगा।”
संसद के बजट सत्र की अवधि को बढ़ाते हुए इसके तहत 16 से 18 अप्रैल तक की तीन दिवसीय विशेष बैठक बुलाई गई है। इस दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण अधिनियम) में संशोधन पेश किए जाएंगे।
भाषा सुमित पवनेश
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