मुख्यमंत्री फडणवीस ने 2027 के नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेले के लिए लोगो का अनावरण किया

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मुख्यमंत्री फडणवीस ने 2027 के नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेले के लिए लोगो का अनावरण किया

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  • Publish Date - May 13, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - May 13, 2026 / 07:00 PM IST

(तस्वीर के साथ)

मुंबई, 13 मई (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 2027 में होने वाले नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए बुधवार को आधिकारिक लोगो का अनावरण किया और कहा कि उनकी सरकार श्रद्धालुओं और संतों के लिए पर्याप्त सुविधाओं के साथ एक ‘भव्य और दिव्य’ कुंभ मेले के आयोजन की तैयारी कर रही है।

फडणवीस ने कहा कि सरकार हर 12 साल में होने वाले आध्यात्मिक समागम के सुचारू आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए अखाड़ों और धर्मगुरुओं के साथ समन्वय में काम कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने कुंभ मेले की तैयारियों पर एक प्रस्तुति दी। संतों और महंतों ने कई सुझाव दिए, जिन्हें गंभीरता से लिया गया है और अधिकारियों को उनपर अमल करने के निर्देश दिए गए हैं।’’

मुख्यमंत्री ने मुंबई में एक कार्यक्रम में नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेले के लोगो का अनावरण करने और 13 प्रमुख अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने के बाद ये बातें कहीं।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री फडणवीस ने सह्याद्री गेस्ट हाउस में उपमुख्यमंत्रियों- एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार- की उपस्थिति में लोगो का अनावरण किया।

कुंभ मेला प्राधिकरण, ‘मायजीओवी’ और एसोसिएशन ऑफ डिजाइनर्स ऑफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक राष्ट्रव्यापी प्रतियोगिता के माध्यम से इस लोगो के डिजाइन का चयन किया गया था।

विज्ञप्ति के अनुसार, 20 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 के बीच आयोजित प्रतियोगिता के दौरान कुल 3,067 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनमें 70 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की प्रविष्टियां भी शामिल थीं।

प्रसून जोशी समेत प्रख्यात डिजाइन विशेषज्ञों की एक समिति ने विजेता डिजाइन का चयन किया। सुमित काटे ने तीन लाख रुपये का प्रथम पुरस्कार जीता, जबकि मयंक नायक ने दो लाख रुपये का दूसरा और पीयूष पिंपलनेरकर ने एक लाख रुपये का तीसरा पुरस्कार प्राप्त किया।

बयान के अनुसार, लोगो में नासिक और त्र्यंबकेश्वर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रतीक शामिल हैं।

सिंहस्थ कुंभ मेला 31 अक्टूबर, 2026 को शुरू होगा और 24 जुलाई, 2028 तक चलेगा, जिसमें मुख्य स्नान कार्यक्रम 2027 में होंगे।

भाषा शफीक सुरेश

सुरेश