पालघर, 22 जून (भाषा) पालघर की एक विशेष अदालत ने 2018 में एक नाबालिग लड़की का शील भंग करने के आरोपी 48 वर्षीय एक कंप्यूटर अध्यापक को पीड़िता की गवाही में विरोधाभास का हवाला देते हुए बरी कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए आर रहाने ने 19 जून को अपने आदेश में कहा कि घटना वाली जगह के पास सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद, अभियोजन पक्ष ने कोई फुटेज पेश नहीं किया।
शिकायतकर्ता के बयानों में विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ यह स्पष्ट है कि पीड़िता ने कथित घटना के समय, शुरुआत और उसके बाद की घटनाओं के बारे में अपने बयान में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।’’
पालघर पुलिस ने 12 फरवरी, 2018 को अपनी कंप्यूटर क्लास में एक नाबालिग़ लड़की को कथित तौर पर चूमने के आरोप में अध्यापक के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे या जानकारी के साथ उस पर हमला करना या आपराधिक बल का इस्तेमाल करना) और पोक्सो कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘पीड़िता ने अपनी रिपोर्ट और अतिरिक्त बयान में ऊपर बताई गई ज़रूरी बातों का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन अदालत के सामने पहली बार उसने ये बातें बताईं। चूंकि उसकी गवाही संदिग्ध लगती है, इसलिए उसके बयान पर भरोसा नहीं किया जा सकता।’’
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ‘स्पॉट पंच’ लगभग 50 मामलों में पंच गवाह रह चुका है, जिसका मतलब है कि वह एक आदतन पंच है।
भाषा राजकुमार मनीषा
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