कांग्रेस नेता ने हैफकिन ‘वैक्सीन स्ट्रेन’ को संभावित रूप से निजी हाथों को सौंपे जाने का विरोध किया

कांग्रेस नेता ने हैफकिन ‘वैक्सीन स्ट्रेन’ को संभावित रूप से निजी हाथों को सौंपे जाने का विरोध किया

कांग्रेस नेता ने हैफकिन ‘वैक्सीन स्ट्रेन’ को संभावित रूप से निजी हाथों को सौंपे जाने का विरोध किया
Modified Date: March 24, 2026 / 05:12 pm IST
Published Date: March 24, 2026 5:12 pm IST

मुंबई, 24 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने मंगलवार को हैफकिन इंस्टीट्यूट से एक दुर्लभ, ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण ‘वैक्सीन स्ट्रेन’ को एक निजी कंपनी को सौंपे जाने के कथित कदम का विरोध किया और आरोप लगाया कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और गरीबों के लिए टीके महंगे हो सकते हैं।

वडेट्टीवार ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए ‘रिलायंस लाइफ साइंसेज’ द्वारा डीपीटी (डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस) ‘वैक्सीन स्ट्रेन’ की खरीद के प्रस्ताव पर शुरू की गई प्रक्रिया पर आपत्ति जताई तथा हैफकिन संस्थान द्वारा अभरुचि पत्र मांगे जाने की जरूरत पर सवाल उठाया।

सन् 1899 में स्थापित हैफकिन संस्थान देश के सबसे पुराने जैव चिकित्सा अनुसंधान संस्थानों में से एक है। इसका नाम वैज्ञानिक डॉ. वाल्डेमर मोर्दकै हैफकिन के नाम पर रखा गया है जिन्होंने प्लेग का टीका विकसित किया था।

यह संस्थान प्रशिक्षण, अनुसंधान और संक्रामक रोगों के विभिन्न पहलुओं के परीक्षण समेत कई कार्यों में संलग्न है।

वडेट्टीवार ने दावा किया, ‘‘हैफकिन के पास मौजूद डीपीटी वैक्सीन का स्ट्रेन एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक जैव-संसाधन है, जिसका बाजार मूल्य करोड़ों रुपये में है। इसके बावजूद, संस्थान ने बिना पर्याप्त विचार-विमर्श किए जल्दबाजी में अभिरूचि आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।’’

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि स्वतंत्र रूप से टीके बनाने में सक्षम एक सार्वजनिक संस्थान इतनी मूल्यवान संपत्ति को एक निजी संस्था को क्यों सौंपना चाहेगा।

उन्होंने पूछा, “जब हैफकिन के पास खुद टीके बनाने की क्षमता है, तो लगभग 1,500 करोड़ रुपये की जैविक संपत्ति एक निजी कंपनी को क्यों सौंपी जा रही है?”

गंभीर परिणामों की चेतावनी देते हुए, वडेट्टीवार ने दावा किया, “अगर यह स्ट्रेन निजी हाथों में चला जाता है, तो जो टीके अभी किफायती दरों पर उपलब्ध हैं, वे महंगे हो सकते हैं, जिससे आम नागरिक सीधे प्रभावित होंगे और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।”

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश


लेखक के बारे में