आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के वीडियो से विवाद, राकांपा विधायक ने गुणवत्ता संबंधी खामियां मानी

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आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के वीडियो से विवाद, राकांपा विधायक ने गुणवत्ता संबंधी खामियां मानी

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 03:06 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 03:06 PM IST

मुंबई, 21 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी केंद्रों पर वितरित किए जा रहे अनाज की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने वीडियो पोस्ट कर दावा किया कि अनाज के नहीं पकने के कारण बच्चों के पेट में दर्द हुआ।

मामले पर सत्तारूढ़ राकांपा के विधायक दिलीप वालसे पाटिल ने राज्यभर में अनाज की गुणवत्ता संबंधी खामियां होने की बात स्वीकार की। वहीं विपक्ष ने कार्यकर्ता के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर सरकार की आलोचना की।

एक क्षेत्रीय समाचार चैनल से बातचीत में पाटिल ने कहा कि खाद्यान्न की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें केवल पुणे जिले के आंबेगांव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों से भी ऐसी ही शिकायतें सामने आई हैं।

पाटिल पुणे जिले की आंबेगांव विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उनकी यह टिप्पणी आंबेगांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रेशमा पारधी द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो के बाद आई है। वीडियो में पारधी ने दावा किया कि बच्चों के दोपहर के भोजन के लिए उपलब्ध कराई गई पीली मटर को लंबे समय तक प्रेशर कुकर में पकाने के बावजूद वह नहीं पकी।

उन्होंने आरोप लगाया कि खाना खाने के बाद बच्चों के पेट में दर्द हुआ और इसके बाद उन्होंने खाना खाने से इनकार कर दिया।

पारधी ने बताया कि आंगनवाड़ी में उपलब्ध कराए गए अन्य अनाज को पकाना भी उतना ही मुश्किल था। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में चार महीने के खाद्यान्न का भंडारण और उसका प्रबंधन कैसे किया जा सकता है।

पारधी ने अपनी अपील में कहा, “मैं सरकार से अनुरोध करती हूं कि हमारे बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न किया जाए।”

उन्होंने खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे से मामले में हस्तक्षेप करने और खाद्य सामग्री की आपूर्ति की जांच करने का अनुरोध किया।

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए पाटिल ने बताया कि इस तरह के खाद्यान्न की खरीद आयुक्त या राज्य स्तर पर की जाती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस मामले को सीधे संबंधित विभाग के सचिव और मंत्री के समक्ष उठाएंगे।

उन्होंने कहा कि यदि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी और उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

पाटिल ने कहा, “सबसे पहले संबंधित ठेकेदार और खाद्यान्न की गुणवत्ता की जांच के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाला पौष्टिक भोजन मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही, घटिया गुणवत्ता की खाद्य सामग्री की आपूर्ति करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

राकांपा (शरदचंद्र पवार) के लोकसभा सदस्य अमोल कोल्हे ने मामले पर प्रशासन की प्रतिक्रिया की आलोचना की। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया। कोल्हे शिरूर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें आंबेगांव विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है।

कोल्हे ने कहा, “यह ऐसा मामला है जिसमें चोर को छोड़ दिया गया और निर्दोष को सजा दी गई।” उन्होंने कहा कि सरकार को खामी उजागर करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सराहना करनी चाहिए थी।

कोल्हे ने कहा कि यह मामला पूरे महाराष्ट्र में व्याप्त एक बड़ी समस्या को दर्शाता है। उन्होंने हाल ही में जुन्नर तहसील में हुई एक घटना का हवाला दिया, जहां बच्चों के दोपहर के भोजन में इस्तेमाल होने वाली हल्दी और मिर्च पाउडर में मिलावट पाई गई थी। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में उपलब्ध कराए जाने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए राज्य स्तर पर जांच की मांग की।

इस बीच, राकांपा (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय रेशमा पारधी को निलंबन का नोटिस जारी किए जाने पर सरकार की आलोचना की।

पवार ने आरोप लगाया, “रेशमा पारधी ने इस मामले को उजागर किया, इसके लिए उनकी सराहना करने के बजाय सरकार ने उन्हें निलंबित करने का फैसला किया।”

उन्होंने पारधी का निलंबन तत्काल वापस लेने की मांग की और खाद्य सामग्री की आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ताओं की 10 दिनों के भीतर पूरी जांच कराने की मांग की।

भाषा तान्या अविनाश

अविनाश