Home » Religion » Quote of the day: When the urge for revenge compels you to give a "tit-for-tat" response, this invaluable teaching from Gautam Buddha can save you from ruin.
Quote of the day: जब बदले की भावना आपको “जैसे को तैसा” करने पर मजबूर करें, तब गौतम बुद्ध की यह अनमोल सीख़ आपको तबाही से बचा लेगी..
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Quote of the day: क्या प्रतिशोध की आग में जलते मन को कभी सुकून मिल सकता है? आइए जानते हैं महात्मा बुद्ध के वो अनमोल विचार, जो हमारे भीतर भड़कते क्रोध और बदले की भावना को जड़ से खत्म कर, ज़िंदगी में कभी न मिटने वाली परम शांति का मार्ग दिखाते हैं..
Quote of the day 21st August 2026: जब कोई अपना हमें धोख़ा देता है, अपमानित करता है, वादा तोड़ता है या फिर जानबूझकर दिल दुखाता है, चोट पहुंचाता है तो अंदर ही अंदर बहुत गुस्सा आता है। मन करता है कि उसे उसी की भाषा में सबक सिखाएं। यह सोचना आम बात है लेकिन गौतम बुद्ध की शिक्षाएँ हमें बताती है कि “बदले की भावना“ हमें कभी शान्ति नहीं देती, बल्कि हमारे मन पर एक भारी बोझ बन जाती है।
बुद्ध की शिक्षाएँ सिर्फ धार्मिक ग्रंथों में पढ़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि इन्हें अपनाकर हम अपनी रोज़ की ज़िंदगी को तनावमुक्त और शांत बना सकते हैं। तो चलिए, आज हम इन्हीं अनमोल सीखों को बहुत ही सरल भाषा में और गहराई से समझते हैं।
हमारी मन में बदला लेने की चाह इसलिए जागती है क्योंकि हम अपनी चोट को बार-बार कुरेदते रहते हैं। हम सोचते हैं कि अगर हम चुप रह गए तो कमज़ोर लगने लगेंगे। लेकिन, बुद्ध कहते हैं कि असली कमज़ोरी तो क्रोध को पकड़कर बैठने में है। नफ़रत का जवाब कभी नफ़रत नहीं हो सकता। जैसे आग को सिर्फ पानी बुझा सकता है, वैसे ही नफ़रत की आग को केवल प्रेम, करुणा और समझदारी से ही शांत किया जा सकता है।
बदला कभी सुकून नहीं देता, सिर्फ दर्द बढ़ाता है!
अब ज़रा सोचिए, क्या धोखा मिलने पर बदला लेना ही आख़िरी रास्ता है? बुद्ध कहते हैं ‘बिलकुल नहीं’। बदला लेना समस्या को सुलझाता नहीं है, बल्कि उसे और लम्बा खींच देता है। बदले की यह आग दुश्मनी के एक ऐसे चक्र को जन्म देती है जो कभी ख़त्म नहीं होता। बुद्ध सिखाते हैं कि हर इंसान को अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। इसलिए, हमें दूसरों के कर्मों का हिसाब रखने में अपना समय और सुकून बर्बाद नहीं करना चाहिए।
बुद्ध सिखाते हैं कि सच्ची जीत वह नहीं जो दूसरों को हराकर मिले, बल्कि वह है जब किसी के क्रोध का जवाब शांति से दें। जब सामने वाला गुस्से में हो तो हम शांत रहे, इससे हम अपना और उसका दोनों का भला करते हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप सब कुछ सहते रहें, गलत इंसान से दूरी बनाना और सीमाएं तय करना ज़रूरी है, पर मन में कड़वाहट रखें खुद को तकलीफ पहुँचाना है। बदले की भावना से लड़ना कठिन ज़रूर है लेकिन सबसे कीमती युद्ध है।
Motivational Quotes: सोच और ज़िंदगी बदल देने वाले 4 स्तम्भ: करुणा, मित्रता, क्षमा और अन्तर्मन!
गौतम बुद्ध की कुछ सीखें ऐसी हैं जो सोच और ज़िंदगी दोनों को बदल देती हैं:
करुणा: करुणा का मतलब है “किसी के दुःख अथवा तकलीफ को समझना”। जब कोई हमें धोखा देता है तो हम सिर्फ अपनी चोट देखते हैं, लेकिन यदि हम थोड़ा रूककर सोचें कि धोखा देने वाला खुद अज्ञान के अंधेरे में है, तो आपका क्रोध दया में बदल जाता है।
मैत्री यानी मित्रता: बुद्ध कहते हैं कि सबके प्रति मित्रता की भावना रखो। रोज़ सुबह उठकर बस कुछ पल के लिए यह विचार करें कि सब सुखी रहे, सब शांत रहें। यह छोटा सा अभ्यास धीरे-धीरे मन को भीतर से शीतल और शांत बना देगा।
क्षमा: क्षमा का मतलब यह नहीं है कि गलत को सही मान लो। इसका सीधा सा अर्थ है कि आप उस कड़वी घटना को अपने दिल से बाहर निकाल फेंकें, ताकि वह आपको बार-बार चोट न पहुँचा सके।
मन पर नज़र रखना यानी अंतर्ध्यान: बुद्ध कहते हैं कि मन ही सब कुछ है। हम जैसा सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं। इसलिए, जब भी मन में प्रतिशोध या बदले का विचार आए, तो उसे एक साक्षी की तरह देखें, पहचानें और धीरे से उसे जाने दें।
बुद्ध कहते हैं कि असली शक्ति बदला लेने में नहीं, बल्कि अपने क्रोध पर विजय पाने में हैं। नफ़रत को सिर्फ प्यार से, बुराई को अच्छाई से और हिंसा को शांति से ही जीता जा सकता है। जैसे ही आप अपने मन से क्रोध की इस आग को बाहर निकाल देते हैं, आपको एक अद्भुत शांति और आज़ादी का एहसास होता है। यही वह सुकून है जो आपकी सोच और पूरी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल देता है।
नहीं। गौतम बुद्ध के अनुसार बदला लेने की इच्छा मन को और अधिक अशांत करती है। यह एक जलते हुए अंगारे को पकड़ने जैसा है, जो पहले खुद को ही जलाता है। नफरत से नफरत कभी खत्म नहीं होती, बल्कि प्रेम और क्षमा से ही शांति मिलती है।
किसी ने धोखा दिया हो तो क्या बदला लेना ही सही रास्ता है?
बुद्ध की शिक्षा के अनुसार बदला लेना आखिरी उपाय नहीं है। बदला लेने से शत्रुता का चक्र और लंबा होता है। सही तरीका है अपनी सीमाएँ तय करना, जरूरत पड़ने पर दूरी बनाना, लेकिन मन में नफरत न पालना। हर व्यक्ति अपने कर्म का फल खुद भोगता है।
क्रोध और बदले की भावना को कैसे काबू में किया जा सकता है?
जब गुस्सा आए तो गहरी साँसें लें और खुद से पूछें कि क्या मैं जलता अंगारा पकड़े हुए हूँ। रोज थोड़ी देर मैत्री भावना का अभ्यास करें, सबके अच्छे की कामना करें। ध्यान और सचेतनता से मन पर नियंत्रण बढ़ता है।
बुद्ध की कौन-सी सीखें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सबसे ज्यादा मददगार हैं?
करुणा, मैत्री (सबके प्रति मित्रता), क्षमा, कर्म के नियम को समझना और मन पर नजर रखना। इन शिक्षाओं को अपनाकर क्रोध कम होता है, रिश्ते सुधरते हैं और मन में स्थायी शांति आती है।