अदालत ने एमएससीबी मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ स्वीकार की, अजित पवार एवं अन्य को मिली ‘क्लीनचिट’

अदालत ने एमएससीबी मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ स्वीकार की, अजित पवार एवं अन्य को मिली ‘क्लीनचिट’

अदालत ने एमएससीबी मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ स्वीकार की, अजित पवार एवं अन्य को मिली ‘क्लीनचिट’
Modified Date: February 27, 2026 / 08:37 pm IST
Published Date: February 27, 2026 8:37 pm IST

मुंबई, 27 फरवरी (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने शुक्रवार को महाराष्ट्र प्रदेश सहकारी बैंक (एमएससीबी) के कथित 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले से संबंधित मामले में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को स्वीकार कर लिया और दिवंगत अजित पवार एवं अन्य आरोपियों को मामले में ‘क्लीन चिट’ दे दी।

अदालत की ओर से ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को स्वीकार किए जाने का फैसला महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री पवार की बारामती में विमान दुर्घटना में मृत्यु के लगभग एक महीने बाद आया है।

सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों से संबद्ध विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ‘सी-समरी’ रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा कि कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है।

अदालत ने ‘क्लोजर रिपोर्ट’ के विरूद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और अन्य की याचिकाएं भी खारिज कर दीं।

यह कथित घोटाला जिला और सहकारी बैंकों द्वारा नियमों का पालन किए बिना सहकारी चीनी कारखानों, कताई मिलों और अन्य संस्थाओं को ऋण वितरित करने से संबंधित था। एमएससीबी महाराष्ट्र का सर्वोच्च सहकारी बैंक है।

बंबई उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद 2019 में इस मामले की जांच शुरू हुई थी।

प्रथम सूचना रिपोर्ट में पवार के अलावा सरकारी अधिकारियों, एमएससीबी के तत्कालीन निदेशकों और अधिकारियों तथा अन्य लोगों के नाम थे। पवार उस समय एक जिला बैंक के निदेशक थे।

ईओडब्ल्यू ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2007 से दिसंबर 2017 तक ऋण वितरण में अनियमितताओं के कारण राज्य के खजाने को 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

वैसे 2020 से इस मामले में कई मोड़ आए। महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान (जिसमें अजित पवार वित्त मंत्री थे) ईओडब्ल्यू ने यह कहते हुए ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल की कि कोई आपराधिक अपराध नहीं हुआ है।

हालांकि, 2022 में सरकार बदलने के बाद, जांच एजेंसी ने मामले को फिर से खोलने की कोशिश की। लेकिन जनवरी 2024 में, अजित पवार द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को विभाजित करके सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने के कुछ महीनों बाद, एजेंसी ने एक बार फिर मामले को बंद करने की रिपोर्ट दाखिल कर दी।

भाषा राजकुमार रंजन

रंजन


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