मुंबई, 28 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने प्रतिबंधित संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) के एक कथित सदस्य को जमानत दे दी है। अदालत ने उसके खिलाफ गवाहों के बयानों को ‘महत्वहीन’ बताया और कहा कि सिर्फ फोन में पेट्रोल बम बनाना सिखाने वाले वीडियो का होना कोई अपराध नहीं है।
न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह राजा भोंसले की पीठ ने कहा कि मोहम्मद इकबाल इब्राहिम खान को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए, क्योंकि मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है।
पिछले सप्ताह जारी एक आदेश में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जिससे खान का कथित अपराधों में शामिल होना साबित हो सके।
अदालत ने खान के खिलाफ पुलिस को दिए गए गवाहों के बयानों को ‘महत्वहीन’ बताते हुए कहा कि इनसे अधिक से अधिक यह पता चलता है कि आरोपी पीएफआई का सदस्य था, लेकिन इससे उस पर लगाए गए किसी भी अपराध की पुष्टि नहीं होती।
अदालत ने पेट्रोल बम बनाना सिखाने वाले वीडियो के खान के फोन में मौजूदगी का जिक्र करते हुए कहा कि उसने वह वीडियो किसी और को नहीं भेजा था और न ही किसी को उस तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए उकसाया था।
महाराष्ट्र अतंकवाद रोधी दल (एटीएस) ने खान को सितंबर 2022 में गिरफ्तार किया था और वह अभी न्यायिक हिरासत में है।
उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, खान पीएफआई का सक्रिय सदस्य था जिसने इस मामले के अन्य आरोपियों के साथ मिलकर भारत सरकार के खिलाफ बगावत करने की साजिश रची थी और फरवरी से जून 2022 के बीच शहर भर में कई बैठकें की थीं। लेकिन पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि मोहम्मद इकबाल इब्राहिम खान को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।
भाषा संतोष पवनेश
पवनेश