नागपुर, 11 जून (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने विदर्भ क्षेत्र में विद्यालयों को फिर से खोलने से संबंधित महाराष्ट्र शिक्षा विभाग के दो आदेशों को रद्द करते हुए निर्देश दिया है कि वहां स्कूल 30 जून के बाद ही खोले जाएं।
उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने बुधवार को यह आदेश विजय डी. कॉम्बे द्वारा दायर एक याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता ने 28 मार्च 2026 के उस सरकारी परिपत्र को चुनौती दी थी जिसमें सभी विद्यालयों को 15 जून से पुनः खोलने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बी.जी. कुलकर्णी ने अदालत को बताया कि याचिका दायर करने के बाद शिक्षा निदेशक द्वारा 9 जून के एक अन्य परिपत्र के माध्यम से विद्यालयों के पुनः खुलने की तारीख 22 जून कर दी गई।
कॉम्बे ने दावा किया कि ये आदेश वर्ष 2007 में अदालत द्वारा दिए गए उस निर्देश का उल्लंघन करते हैं जिसमें कहा गया था कि विदर्भ क्षेत्र के लिए विद्यालयों के फिर से खुलने की एक समान तिथि निर्धारित करना मनमाना होगा। उन्होंने वर्ष 2023 के उस सरकारी प्रस्ताव (जीआर) का भी हवाला दिया, जिसमें विद्यालयों के पुनः खुलने की तिथि 30 जून तय की गई थी।
शिक्षा विभाग ने 15 जून के बजाय 22 जून से स्कूल खोलने के अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम याचिकाकर्ता की आपत्ति को ध्यान में रखकर उठाया गया है तथा विदर्भ क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी को भी इसमें ध्यान में रखा गया है।
न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने कहा कि शिक्षा विभाग के आदेश उच्च न्यायालय की एक समन्वय पीठ द्वारा 8 जून 2007 को दिए गए निर्देशों से असंगत हैं जो महाराष्ट्र में 15 जून से स्कूल खोलने से संबंधित याचिका पर दिया गया था।
वर्ष 2007 में समन्वय पीठ ने विदर्भ क्षेत्र में अत्यधिक तापमान और उसके छात्रों के स्वास्थ्य पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए 15 जून से स्कूल खोलने के निर्णय को अनुचित माना था।
अदालत ने कहा कि चूंकि समन्वय पीठ पहले ही इस मुद्दे पर निर्णय दे चुकी है इसलिए शिक्षा विभाग को ऐसे परिपत्र जारी नहीं करने चाहिए थे।
उच्च न्यायालय ने 28 मार्च 2026 और 9 जून 2026 के दोनों परिपत्रों को रद्द कर दिया तथा राज्य सरकार को 2023 के जीआर के अनुसार कार्यवाही करने और विदर्भ क्षेत्र में स्कूल 30 जून के बाद ही पुनः खोलने का निर्देश दिया।
भाषा अमित नरेश
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