मुंबई, 23 जून (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे ने मंगलवार को आरोप लगाया कि शिवसेना (उबाठा) के वे छह सांसद जो एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में शामिल हो गए हैं उन्होंने ‘खुद को बेच दिया’ और उन्हें प्रलोभन देकर पार्टी से तोड़ा गया।
शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सदस्यों में से छह ने सोमवार को आधिकारिक रूप से सत्तारूढ़ शिंदे गुट में शामिल होकर 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट में हुए विभाजन के बाद एक और बड़ी राजनीतिक टूट को औपचारिक रूप दे दिया।
पार्टी छोड़ने वाले सांसदों में संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), नागेश पाटिल-अष्टिकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वकचौरे (शिर्डी) शामिल हैं।
इनमें से कुछ सांसदों ने दावा किया था कि सत्तारूढ़ पक्ष में जाने से उनके क्षेत्रों में बड़े विकास कार्य लाने में मदद मिलेगी।
दानवे ने आरोप लगाया, ‘‘हमसे अलग होकर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए सभी छह सांसदों ने खुद को बेच दिया है। यह दावा कि उन्हें विकास निधि नहीं मिल रही थी, पूरी तरह झूठ और गलत है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘शिंदे के साथ उनके सौदे का विवरण जल्द सामने आएगा।’’
विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में दानवे ने यह भी कहा कि विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) की एक और बैठक तय की गई है और सभी विधायक उसमें मौजूद रहेंगे।
उन्होंने कहा, ‘हम पहले ही कह चुके हैं कि कल महा विकास आघाडी की एक और बैठक होगी और सभी विधायक उसमें मौजूद रहेंगे।’
सोमवार को छह सांसदों के पाला बदलने के दौरान, शिवसेना नेता किरण पावसकर ने कहा कि पार्टी कोई ‘डे-केयर’ नहीं है। उन्होंने यह बात शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की उस पुरानी अपील का ज़िक्र करते हुए कही, जिसमें उन्होंने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे का ध्यान रखने को कहा था।
इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘ पावसकर आज जो हैं, वह बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना के आशीर्वाद से हैं। शिंदे को ऐसे अपमानजनक बयान देने पर उन्हें पार्टी से निकाल देना चाहिए।’’
शिंदे गुट द्वारा अपने अलग पार्टी कार्यालय के लिए जमीन तलाशने की खबरों पर दानवे ने कहा कि कोई भी नई इमारत मुंबई के दादर स्थित मूल शिवसेना भवन की पवित्रता की बराबरी नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा, ‘‘वास्तविक शिवसैनिकों के लिए नई इमारत कभी भी मूल शिवसेना भवन जैसी पवित्र नहीं हो सकती। गद्दारों की इमारत को कभी वही सम्मान नहीं मिल सकता जो असली शिवसेना भवन को मिलता है।’’
भाषा शोभना मनीषा
मनीषा