धनखड़ को विपक्ष के साथ ‘विस्फोटक’ विचारों का आदान-प्रदान करने के कारण जाना पड़ा: शिवसेना (उबाठा)

धनखड़ को विपक्ष के साथ ‘विस्फोटक’ विचारों का आदान-प्रदान करने के कारण जाना पड़ा: शिवसेना (उबाठा)

धनखड़ को विपक्ष के साथ ‘विस्फोटक’ विचारों का आदान-प्रदान करने के कारण जाना पड़ा: शिवसेना (उबाठा)
Modified Date: March 5, 2026 / 05:00 pm IST
Published Date: March 5, 2026 5:00 pm IST

मुंबई, पांच मार्च (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को जब पता चला कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ विपक्षी नेताओं के साथ “विस्फोटक” विचारों का आदान-प्रदान कर रहे थे, तब उन्हें स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।

अपने मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में पार्टी ने कहा कि राज्यसभा सभापति के रूप में धनखड़ अक्सर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा की प्रशंसा में व्याख्यान देते थे। पार्टी ने कहा कि धनखड़ के मन में रहा होगा कि वह हमेशा संवैधानिक पद पर आसीन रहें।

संपादकीय में कहा गया, हालांकि अचानक सरकार ने “आदेश जारी किए और धनखड़ को स्थायी रूप से घर पर बैठना पड़ा”।

धनखड़ ने 21 जुलाई, 2025 को स्वास्थ्य कारणों और चिकित्सा सलाह का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अचानक इस्तीफे से अटकलें लगने लगीं और विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्होंने सरकार के दबाव में इस्तीफा दिया है।

संपादकीय में कहा गया कि जिस दिन धनखड़ ने अपना इस्तीफा दिया, उस दिन उनका स्वास्थ्य अच्छा था। इसमें यह भी दावा किया गया कि धनखड़ ने कभी यह नहीं कहा कि वह अस्वस्थ होने के कारण इस्तीफा दे रहे हैं।

शिवसेना (उबाठा) ने कहा, “पूर्व उपराष्ट्रपति ने सच्चाई को जनता के सामने ला दिया है। लेकिन उन्हें अपने संसदीय कार्यालय में पर्दे के पीछे घटी घटनाओं पर भी प्रकाश डालना चाहिए।”

संपादकीय में कहा गया, “धनखड़ ने सरकार के विरोधी राजनीतिक दलों के साथ अच्छे संबंध स्थापित कर लिए थे और वे उनके साथ अपनी निजी बैठकों में विस्फोटक विचारों का आदान-प्रदान करते थे।”

इसमें कहा गया कि सरकार को इन बैठकों के बारे में सूचना मिल गयी।

शिवसेना (उबाठा) ने दावा किया, “इसके बाद (सरकार ने) यह निर्णय लिया कि उपराष्ट्रपति की तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें इलाज और आराम की आवश्यकता है। इसके अनुसार, एक चिकित्सा प्रमाण पत्र तैयार किया गया और उसे त्यागपत्र के साथ संलग्न कर दिया गया।”

भाषा प्रशांत माधव

माधव


लेखक के बारे में