छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में तालाब में फंसकर हाथी के शावक की मौत

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में तालाब में फंसकर हाथी के शावक की मौत

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  • Publish Date - May 25, 2026 / 10:14 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 10:14 PM IST

रायगढ़, 25 मई (भाषा) छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक तालाब में फंसकर हाथी के एक शावक की मौत हो गई। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के साथ ही, पिछले एक साल में धरमजयगढ़ वन परिक्षेत्र में अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न कारणों से 10 से अधिक हाथी के शावकों की मौत हो चुकी है। वन विभाग ने मौतों के कारणों का अध्ययन करने और स्थानीय कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेषज्ञों को बुलाया है।

उन्होंने बताया कि यह घटना शनिवार रात को छाल वन क्षेत्र के एक गांव के पास स्थित एक तालाब में हुई।

धरमजयगढ़ के वन मंडल अधिकारी जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि शनिवार रात को हाथी का बच्चा अमामुड़ा तालाब में फंस गया था।

उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे और पूरी रात स्थिति पर नजर रखी। अगले दिन वरिष्ठ अधिकारियों और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम सहित जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गई।

अधिकारी ने बताया कि शावक की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए उसके नमूने राष्ट्रीय संस्थानों में भेजे गए हैं, और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि विभाग भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक विशेष रणनीति पर काम कर रहा है।

अधिकारी ने बताया कि हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों और जलस्रोतों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा, और उन तालाबों या जलाशयों की पहचान की जा रही है जहां हाथी के बच्चों के फंसने या दुर्घटना का शिकार होने का खतरा अधिक है।

उन्होंने कहा कि विभाग जरूरत पड़ने पर ऐसे स्थानों पर सुरक्षित ढलान और पहुंच मार्ग भी विकसित करेगा।

उपाध्याय ने बताया कि रात की गश्त बढ़ा दी गई है, और ‘हाथी मित्र दल’ के सदस्यों, ट्रैकर्स और वन कर्मचारियों की संयुक्त टीमें प्रभाग में हाथियों की आवाजाही पर लगातार नज़र रख रही है।

उन्होंने कहा कि किसी भी असामान्य गतिविधि का समय पर पता लगाने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए ट्रैप कैमरे, ड्रोन और थर्मल ड्रोन का इस्तेमाल भी बढ़ा दिया गया है।

अधिकारी ने बताया कि इस घटना के बाद, वन विभाग ने वैज्ञानिक निगरानी और अध्ययन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ अपना समन्वय बढ़ा दिया है।

रायपुर में वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पिछले एक साल में धरमजयगढ़ वन प्रभाग में 10 से अधिक हाथी के बच्चों की मौत अलग-अलग वजहों से हुई है। इनमें डूबना, दलदली इलाकों में फंसना और कीटनाशक मिले हुए फसलें खाना शामिल है।

अधिकारी ने बताया कि हाल में हुई मौत की वजह भी डूबना ही लग रहा है। पिछली दो मौतें आठ मई और 11 मई को रिपोर्ट की गई थी।

उन्होंने बताया कि देहरादून और बरेली के विशेषज्ञ इस क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, ताकि हाथियों की रहने की जगहों की स्थिति का जायजा ले सकें और हाथियों की मौतें कम करने के लिए बचाव के उपाय सुझा सकें।

उन्होंने बताया कि अगले महीने रायगढ़ में इस वन मंडल के वन कर्मचारियों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें पूरे देश से वन्यजीव विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।

वन अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 28 महीनों में राज्य में अलग-अलग वजहों से करीब 45 हाथियों की मौत हुई है।

भाषा सं संजीव शोभना

शोभना