नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद से लापता मुंबई निवासी चिकित्सक के परिजनों को चमत्कार की आस
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद से लापता मुंबई निवासी चिकित्सक के परिजनों को चमत्कार की आस
मुंबई, 30 अगस्त (भाषा) नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद से लापता मुंबई निवासी चिकित्सक एवं पर्वतारोही मिलिंद चितले का परिवार हर गुजरते पल के साथ चमत्कार की प्रार्थना कर रहा है। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त को अचानक आयी बाढ़ के बाद लापता मिलिंद समेत अन्य लोगों की तलाश अब भी जारी है।
डॉ. चितले और उनकी पत्नी जाह्नवी ने मुंबई तथा महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों के रहने वाले 61 सदस्यीय कैलाश मानसरोवर यात्री दल का नेतृत्व किया था।
उनकी बहन मंजरी ने बताया कि जब यह समूह तिब्बत सीमा पर स्थित आव्रजन केंद्र में था, तभी अचानक आई बाढ़ की तेज धारा में केंद्र की इमारत पूरी तरह बह गई।
उन्होंने मित्रों के साथ साझा किए गए एक बयान में कहा, ‘‘तलाश अभियान अभी जारी है और हम प्रार्थना कर रहे हैं और चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।’’
यह समूह 23 अगस्त को मुंबई से काठमांडू के लिए रवाना हुआ था और उससे आखिरी संपर्क 25 अगस्त की शाम को हुआ था। इसके कुछ घंटे बाद 26 अगस्त की सुबह पहाड़ी क्षेत्र में आई तेज बाढ़ ने आव्रजन केंद्र की महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को तबाह कर दिया था।
समूह को दो सितंबर को कैलाश परिक्रमा पूरी करने के बाद छह सितंबर को मुंबई लौटना था।
डॉ. चितले ‘हिल्स एंड ट्रेल्स’ के संस्थापक हैं और करीब तीन दशक से हिमालय में पर्वतारोही अभियानों का नेतृत्व कर रहे हैं। डॉ चितले ने अपने क्लीनिक के बाहर एक सूचना चस्पा की थी, जिसमें बताया गया था कि यह छह सितंबर तक बंद रहेगी।
यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, समूह को 26 अगस्त की सुबह तिमुरे से चीन सीमा के लिए रवाना होना था और शनिवार को मानसरोवर पहुंचना था।
तीर्थयात्रियों को शनिवार को ही सुबह आव्रजन जांच केंद्र पर मौजूद रहना था। उसी समय नेपाल-तिब्बत सीमा के पास विनाशकारी बाढ़ आई।
डॉ. चितले की बहन ने बताया, ‘‘मिलिंद की ट्रैवल कंपनी ‘हिल्स एंड ट्रेल्स’ के साझेदार मौके पर पहुंच गए हैं। उन्होंने स्थानीय टूर कंपनी के मालिक श्री संगय के साथ घटनास्थल का दौरा किया और वहां हुए नुकसान तथा मौजूदा स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से देखा है।’’
उन्होंने कहा कि परिवार को मिली जानकारी के अनुसार, आपदा के समय करीब 600 लोग आव्रजन केंद्र के अंदर या उसके आसपास मौजूद थे।
मंजरी ने कहा, ‘‘अगर इस तबाही में कोई जीवित बचा है तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।’’ उन्होंने बताया कि बचाव और तलाश अभियान अब भी जारी है।
उन्होंने कहा कि जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना ‘बहुत कम’ दिखाई दे रही है और हर गुजरते दिन के साथ यह उम्मीद घटती जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे मौके से मिली वास्तविक जानकारी यही है, जिसे मैं सभी के साथ साझा कर रही हूं। तलाश अभियान अब भी जारी है और अब हम सब प्रार्थना कर रहे हैं, उम्मीद है कोई चमत्कार हो जाए।’’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर दंपती के मोबाइल फोन की आखिरी ज्ञात लोकेशन भारतीय समयानुसार सुबह 8:28 बजे सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट के पास दर्ज की गई थी।
लापता लोगों के इस समूह में पी. डी. हिंदुजा अस्पताल में रक्त आधान चिकित्सा (ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन) के सलाहकार डॉ. आनंद देशपांडे और उनकी पत्नी डॉ. गायत्री देशपांडे भी शामिल हैं, जो नानावती मैक्स अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष हैं।
भाषा संतोष नरेश
नरेश

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