महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडे के खिलाफ प्राथमिकियां व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम हैं : न्यायालय

महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडे के खिलाफ प्राथमिकियां व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम हैं : न्यायालय

महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडे के खिलाफ प्राथमिकियां व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम हैं : न्यायालय
Modified Date: May 21, 2026 / 06:43 pm IST
Published Date: May 21, 2026 6:43 pm IST

मुंबई, 21 मई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय पांडे, वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर जगताप और अन्य के खिलाफ दर्ज कई प्राथमिकियों को ‘‘व्यक्तिगत रंजिश’’ का परिणाम बताते हुए आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की पीठ ने बुधवार को पांडे और अन्य के खिलाफ मामलों को खारिज करते हुए इन आपराधिक कार्यवाहियों को ‘‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’’ करार दिया।

बृहस्पतिवार को उपलब्ध विस्तृत आदेश में अदालत ने कहा कि पूर्व पुलिस महानिदेशक और अन्य के खिलाफ शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप ‘‘अस्पष्ट हैं और उनमें ठोस विवरण का अभाव है।’’

पीठ ने कहा कि आरोप केवल अनुमान आधारित हैं और पुलिस द्वारा दायर ‘सी समरी’ (क्लोजर) रिपोर्ट के मद्देनजर झूठे साबित हुए हैं।

व्यवसायी संजय मिश्रीमल पुनमिया ने 2024 में कई शिकायतें दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि पांडे, जगताप और सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) सरदार पाटिल और निरीक्षक मनोहर पाटिल समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने एक बड़े आपराधिक षड्यंत्र में हिस्सा लिया।

पुनमिया का आरोप था कि आरोपियों ने 2021 में जगताप के नियुक्ति पत्रों में फर्जीवाड़ा कर उन्हें विभिन्न वसूली और धोखाधड़ी मामलों में विशेष लोक अभियोजक के रूप में गलत तरीके से पेश किया, ताकि उन्हें लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रखा जा सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस तंत्र का इस्तेमाल उन पर दबाव बनाने के लिए किया गया, ताकि वे पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह और कुछ राजनीतिक हस्तियों को फंसाएं।

पुनमिया ने दावा किया कि पांडे और अन्य ने पुराने मामलों को दोबारा खोलने और फर्जी प्राथमिकियां दर्ज कर उन्हें फंसाने की धमकी देकर उनसे झूठे बयान दिलवाने की कोशिश की।

व्यवसायी ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान पुलिस अधिकारियों ने पांडे के निर्देशों का हवाला देते हुए उन पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उस समय के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ‘अर्बन लैंड सीलिंग’ घोटाले में झूठा फंसाने का दबाव डाला और बदले में उनके खिलाफ आरोप हटाने का आश्वासन दिया।

बहरहाल, उच्च न्यायालय ने कहा कि पुनमिया स्वयं वसूली, दबाव बनाने और राज्य के गोपनीय दस्तावेज चुराने जैसे कई आपराधिक मामलों में घिरे हुए थे, जिससे दोनों पक्षों के बीच गहरी दुश्मनी पैदा हो गई थी।

अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ‘‘आदतन मुकदमेबाज’’ है और उसके द्वारा दायर एक अपील में उसके खिलाफ अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्यवाही भी शुरू की गई थी।

अदालत ने कहा, ‘‘दोनों मामलों में लगाए गए आरोप हताशा और प्रतिशोध की मानसिकता का परिणाम हैं और दूसरा पक्ष ऐसे मामले में जांच की मांग कर रहा है, जिसमें किसी जांच की आवश्यकता ही नहीं है।’’

पीठ ने जोर देते हुए कहा कि ‘‘कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल गलत उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता और दुर्भावना से प्रेरित आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया जा सकता है।’’

मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियां ‘‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’’ हैं इसलिए उनसे उत्पन्न सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द किया जाता है।

भाषा गोला नरेश

नरेश


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