मुंबई, 10 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) मंत्री नरहरि झिरवाल ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा कानून में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ पहले से ही कड़े प्रावधान हैं, लेकिन इन्हें लागू करने और प्रयोगशाला से जुड़ी दिक्कतों के कारण कार्रवाई में अक्सर देरी होती है।
वह विधानसभा में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के लिए आजीवन कारावास या फांसी की सजा की मांग पर जवाब दे रहे थे।
भाजपा विधायक प्रकाश सोलंके ने जालना में घी बनाने की एक इकाई में कथित तौर पर मिलावट किए जाने के मामले में सरकार की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में सवाल पूछा था। इस पर झिरवाल ने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
मंत्री ने कहा, ‘जालना की फैक्टरी से लिए गए आठ नमूनों में से छह तय मानकों के अनुसार नहीं पाए गए। इसी के अनुरूप कंपनी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।’
खाद्य मिलावट करने वालों को आजीवन कारावास या फांसी की सजा देने की मांग पर झिरवाल ने कहा कि मौजूदा कानून पहले से ही सख्त है, लेकिन इन्हें लागू करने और प्रयोगशाला से जुड़ी दिक्कतों के कारण कार्रवाई में देरी होती है।
उन्होंने कहा, ‘कानून में अपराध की गंभीरता के अनुसार एक लाख रुपये के जुर्माने से लेकर आजीवन कारावास और फांसी तक की सजा का प्रावधान है। इस मामले में भी उचित कानूनी प्रावधान लागू किए जाएंगे।’
वहीं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने शुक्रवार को विधानसभा को बताया कि महाराष्ट्र आबकारी विभाग ने वर्ष 2023-24 से अब तक अवैध शराब के निर्माण, बिक्री व आपूर्ति से जुड़े 1,00,048 मामले दर्ज किए हैं और 72,620 लोगों को गिरफ्तार किया है।
भाजपा विधायक अमित साटम के सवाल के लिखित जवाब में आबकारी विभाग का प्रभार संभाल रहीं पवार ने बताया कि इस अवधि में विभाग ने 289 करोड़ रुपये की अवैध शराब और अन्य सामग्री भी जब्त की है।
भाषा जोहेब पवनेश
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