सावरकर को भारत रत्न की मांग संबंधी प्रस्ताव को लेकर भाजपा विधायक ने अपनी ही पार्टी को घेरा

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सावरकर को भारत रत्न की मांग संबंधी प्रस्ताव को लेकर भाजपा विधायक ने अपनी ही पार्टी को घेरा

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  • Publish Date - July 10, 2026 / 03:23 PM IST,
    Updated On - July 10, 2026 / 03:23 PM IST

मुंबई, 10 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने भाजपा नीत महाराष्ट्र सरकार से राज्य विधानसभा में शुक्रवार को सवाल किया कि हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित करने में ‘‘देरी’’ क्यों हो रही है।

मुनगंटीवार ने सदन में कहा कि सत्ता में आने के बाद किसी भी पार्टी को अपनी विचारधारा नहीं बदलनी चाहिए और अगर किसी मुद्दे पर सरकार का रुख बदला है, तो उसे खुलकर व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने इस देरी को लेकर दुख भी जताया।

इस साल मार्च में, मुनगंटीवार ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें सावरकर को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न प्रदान करने की मांग की गई थी।

मानसून सत्र के आखिरी दिन इस मुद्दे को उठाते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने 5 मार्च को सदन को आश्वासन दिया था कि प्रस्ताव पर ‘‘शीघ्र’’ विचार किया जाएगा, लेकिन इसे पिछले बजट सत्र या मौजूदा मानसून सत्र की कार्यसूची में शामिल नहीं किया गया।

भाजपा विधायक ने कहा, ‘‘वीर सावरकर ने अंग्रेजों के अत्याचार सहे थे। कम से कम हमें तो अनजाने में भी अपनी देरी से उन्हें और तकलीफ नहीं देनी चाहिए। हमें बस एक प्रस्ताव पास करना है। क्या किसी फाइल को इतने लंबे समय तक रोक कर रखा जा सकता है? पांच मार्च से 10 जुलाई तक (सदन के) दो सत्र बीत चुके हैं।’’

राज्य के पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि सत्ता में आने का मतलब विचारधारा में बदलाव नहीं होना चाहिए।

उन्होंने प्रस्ताव पारित करने में हुई देरी का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अगर सत्ता में आने के बाद आपकी विचारधारा बदल गई है, तो मैं इस मुद्दे को दोबारा कभी नहीं उठाऊंगा। लेकिन आपके कार्य उस विचारधारा से मेल नहीं खाते, जिसका आप पालन करने का दावा करते हैं।’’

मुनगंटीवार ने कहा, ‘‘जब कोई पार्टी सत्ता में आती है, तो उसे अपनी विचारधारा नहीं बदलनी चाहिए। अगर इस मुद्दे पर सरकार का रुख बदला है, तो उसे खुलकर इसे व्यक्त करना चाहिए।’’ उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल से सरकार का रुख स्पष्ट करने का आग्रह किया।

इस देरी पर निराशा जताते हुए भाजपा के वरिष्ठ विधायक ने कहा, ‘‘सावरकर की विचारधारा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले एक कार्यकर्ता के तौर पर, मुझे ऐसा लग रहा है कि हमारी अपनी सरकार ही इस फाइल को दबाकर बैठी हुई है। मुझे इसका बेहद अफसोस है। अब मैं यह मुद्दा कभी नहीं उठाऊंगा।’’

इसपर विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर ने कहा कि प्रस्ताव को सदन के समक्ष इसलिए नहीं रखा गया, क्योंकि कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) में इस पर चर्चा नहीं हुई थी।

नार्वेकर ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, यह मुद्दा बीएसी के समक्ष नहीं आया। मुझे सभी दलों के सदन के नेताओं के साथ चर्चा किए बिना ऐसा प्रस्ताव लाना उपयुक्त नहीं लगा।’’

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने आसन (विधानसभा अध्यक्ष) को सूचित किया है कि वह इस विषय पर काम कर रही है और सदस्यों को भरोसा दिलाया कि अगले सत्र के दौरान बीएसी में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप