उच्च न्यायालय ने वकील की ‘न्यायिक आतंकवाद’ टिप्पणी पर नाराजगी जताई, कार्रवाई की चेतावनी

उच्च न्यायालय ने वकील की ‘न्यायिक आतंकवाद’ टिप्पणी पर नाराजगी जताई, कार्रवाई की चेतावनी

उच्च न्यायालय ने वकील की ‘न्यायिक आतंकवाद’ टिप्पणी पर नाराजगी जताई, कार्रवाई की चेतावनी
Modified Date: July 15, 2026 / 09:48 pm IST
Published Date: July 15, 2026 9:48 pm IST

नागपुर, 15 जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अधिवक्ता के आपत्तिजनक व्यवहार और अपने मुवक्किल के मामले की कार्यवाही को ‘‘न्यायिक आतंकवाद’’ बताए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई।

उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियां पूरी तरह अनुचित हैं और न्यायपालिका जैसी संस्था पर सीधा हमला करने के समान हैं।

उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास ने 13 जुलाई के अपने आदेश में अधिवक्ता वी. ए. कोठाले को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि उनके आपत्तिजनक व्यवहार के मामले को महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल के पास कार्रवाई के लिए क्यों न भेजा जाए।

अदालत एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने एक स्कूल को उसे सेवानिवृत्ति की तारीख से बकाया वेतन, भविष्य निधि और ग्रेच्युटी की राशि जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया। महिला उस स्कूल में शिक्षिका थी।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि यदि महिला के बकाया भुगतान का निपटारा नहीं किया जाता है, तो संबंधित विश्वविद्यालय को उस स्कूल की मान्यता वापस लेने का निर्देश दिया जाए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या ऐसी याचिका सुनवाई योग्य है और कानून के किस प्रावधान के तहत स्कूल की मान्यता वापस लेने की कार्रवाई की जा सकती है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने संबंधित कानूनी प्रावधानों का हवाला देने के बजाय सामान्य और आधारहीन दलीलें पेश कीं।

इसके बाद पीठ ने याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर 50,000 रुपये जमा कराने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं करने पर याचिका खारिज कर दी जाएगी।

इस पर नाराज होकर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कोठाले ने टिप्पणी की कि यह कार्यवाही ‘‘न्यायिक आतंकवाद’’ के समान है।

अदालत ने इस टिप्पणी पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा कहना पूरी तरह अनुचित है, अधिवक्ता की गरिमा के अनुरूप नहीं है और न्यायपालिका जैसी संस्था पर बेवजह हमला करने के समान है। अदालत ने कोठाले को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उन्हें 28 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश


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