राकांपा(शप) ने परिसीमन विधेयक पर रुख तय नहीं किया, मीडिया में आई खबरें महज कयास : सुले

राकांपा(शप) ने परिसीमन विधेयक पर रुख तय नहीं किया, मीडिया में आई खबरें महज कयास : सुले

राकांपा(शप) ने परिसीमन विधेयक पर रुख तय नहीं किया, मीडिया में आई खबरें महज कयास : सुले
Modified Date: July 15, 2026 / 05:35 pm IST
Published Date: July 15, 2026 5:35 pm IST

मुंबई, 15 जुलाई (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप)की नेता सुप्रिया सुले ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर अब तक कोई रुख तय नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि मीडिया में राकांपा(शप) द्वारा इस कानून का समर्थन करने संबंधी खबरें अनाम सूत्रों पर आधारित थीं और उनसे भ्रम पैदा हुआ।

सुले ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

बारामती की लोकसभा सदस्य ने कहा कि पार्टी और विपक्षी गठबंधन ‘महा विकास आघाडी’(एमवीए) के कार्यकर्ताओं के बीच किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति से बचने के लिए उन्होंने पार्टी अध्यक्ष शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल सहित राकांपा(शप)के शीर्ष नेतृत्व से सलाह-मशविरा करने के बाद इस मामले पर स्थिति स्पष्ट की है।

सुले ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, कांग्रेस नेता सतेज पाटिल और शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत से भी बात की थी।

उन्होंने कहा कि पार्टी को केंद्र से परिसीमन की प्रक्रिया के बारे में कोई लिखित प्रस्ताव नहीं मिला है और इसलिए, इस चरण पर कोई औपचारिक रुख नहीं अपनाया जा सकता। हालांकि, सुले ने कहा कि अगर ऐसा कोई प्रस्ताव मिलता है तो पार्टी 24 घंटे के भीतर अपना रुख स्पष्ट कर देगी।

उन्होंने कहा कि मीडिया में आई उन खबरों से भ्रम पैदा हुआ जिनमें कहा गया था कि राकांपा(शप) इस विधेयक का समर्थन करेगी; ये खबरें अज्ञात सूत्रों पर आधारित थीं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने हाल में दावा किया था कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शरद पवार की अगुवाई वाली राकांपा (शप) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है ताकि 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए समर्थन जुटाया जा रहा है। इस संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रावधान है।

इस मुद्दे पर पहले हुई चर्चाओं का ज़िक्र करते हुए सुले ने कहा कि संसद द्वारा महिला आरक्षण विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किए जाने के बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने उन्हें, शिवसेना (उबाठा) सांसद अरविंद सावंत और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी को परिसीमन पर बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे।

सुले ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने चिंता जताई थी कि केवल आबादी के आधार पर परिसीमन उनके साथ अन्यायपूर्ण होगा और उन्होंने ऐसे कदम का विरोध किया था। उन्होंने बताया कि चर्चा के दौरान विपक्षी नेताओं ने एक वैकल्पिक फार्मूला खोजने का सुझाव दिया।

राकांपा (शप) सांसद के मुताबिक रीजीजू ने तब कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था।

सुले ने कहा कि इस फॉर्मूले के तहत महाराष्ट्र में लोकसभा सीटों की संख्या 48 से बढ़कर 72 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद बढ़ी हुई सीटों की संख्या पर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाएगा।

बारामती की लोकसभा सदस्य ने कहा कि अगर प्रस्तावित विधेयक में सभी राज्यों में सीटों को एक समान 50 प्रतिशत बढ़ाने का प्रावधान होता है, तो इसका विरोध करने का कोई खास कारण नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसे प्रस्ताव का समर्थन करने के बारे में कोई भी फैसला विपक्षी ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’ गठबंधन) के घटकों से सलाह-मशविरा के बाद ही लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्ष ने केंद्र को पत्र लिखकर मांग की है कि अलग-अलग पार्टियों के साथ अलग-अलग बातचीत करने के बजाय इस प्रस्ताव पर सामूहिक चर्चा की जाए।

सुले ने आरोप लगाया कि जब सरकार बाद में प्रस्तावित विधेयक को ले आई, तो मसौदा में सीटों संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का कोई ज़िक्र नहीं था। उन्होंने दावा किया कि अमित शाह ने ऐसे प्रावधान को शामिल करने के लिए सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित करने का सुझाव दिया था, लेकिन यह प्रस्ताव कभी अमल में नहीं आया और विधेयक उस रूप में पेश नहीं किया गया।

भाषा धीरज माधव

माधव


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