ठाणे, 11 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र में ठाणे जिले के कल्याण की एक अदालत ने अस्पताल में चिकित्सकों की पिटाई के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ शुक्रवार को आरोप तय किए।
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के पार्षद म्हात्रे और सह-आरोपी रमेश पवार, प्रमोद निकम, अक्षय करांडे एवं साधना करांडे ने छह जुलाई को डोंबिवली पश्चिम स्थित शास्त्री नगर अस्पताल में कथित तौर पर चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की पिटाई की थी।
यह घटना साधना करांडे की गर्भवती बेटी के इलाज में कथित देरी को लेकर विवाद के बाद हुई थी।
विशेष लोक अभियोजक प्रकाश सालसिंगिकर ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) नीलेश वसाडे की अदालत में आरोप औपचारिक रूप से तय किए गए।
उन्होंने बताया कि अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है।
अदालत में दाखिल 1819 पन्नों के आरोप-पत्र के अनुसार, आरोपी साधना शरद करांडे अपनी गर्भवती बेटी को शास्त्री नगर अस्पताल के प्रसूति वार्ड में लेकर आई थीं और सोनोग्राफी रिपोर्ट देखने के बाद वहां मौजूद चिकित्सकों एवं शिकायतकर्ता- डॉ. वैभव नामदेव सालुंके तथा डॉ. सृष्टि महेंद्र बाविस्कर- ने पाया कि बच्चे के गले में गर्भनाल के दो फंदे लिपटे हुए थे।
आरोप-पत्र के अनुसार, प्रसव के लिए तत्काल नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) की जरूरत थी, जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी, इसलिए चिकित्सकों ने मरीज को मुंबई के सायन अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
करांडे ने हालांकि मरीज को स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया और म्हात्रे से संपर्क किया।
आरोप-पत्र में बताया गया कि इसके बाद म्हात्रे अन्य आरोपियों के साथ अस्पताल पहुंचे और कर्मचारियों के साथ मारपीट की।
आरोप-पत्र के मुताबिक, म्हात्रे ने डॉ. सालुंके को थप्पड़ मारा और डॉ. बाविस्कर तथा नर्सिंग कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज तथा उनके साथ हाथापाई भी की।
म्हात्रे और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत हमला करने, चोट पहुंचाने, गैर-कानूनी जमावड़ा, दंगा करने, आपराधिक धमकी देने, जानबूझकर अपमान करने और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के पालन से रोकने के आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा, आरोपियों पर महाराष्ट्र चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम की धाराओं- तीन और चार के तहत तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धाराओं 37(1)(3) और 135 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।
ये धाराएं ठाणे विशेष शाखा के पुलिस उपायुक्त की ओर से जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने से संबंधित हैं।
पुलिस द्वारा 1,819 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल किए जाने के बाद म्हात्रे शुक्रवार को औपचारिक कार्यवाही का सामना करने के लिए कल्याण जिला एवं सत्र अदालत में पेश हुए।
पुलिस उपायुक्त अतुल जेंडे और विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता प्रकाश सालसिंगिकर ने कल्याण जिला एवं सत्र अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया।
पुलिस के अनुसार, आरोप-पत्र में प्रमुख गवाहों के बयान एवं साक्ष्य शामिल हैं, जिनमें चिकित्सक, नर्स, अस्पताल कर्मचारी और सीसीटीवी नेटवर्क के ठेकेदारों के बयान भी शामिल हैं।
म्हात्रे शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) नीलेश वसाडे की अदालत में पहुंचे।
वह बिना किसी आधिकारिक सुरक्षा घेरे, समर्थकों के काफिले या तामझाम के अदालत पहुंचे।
चेहरे पर मास्क लगाए म्हात्रे केवल दो सहयोगियों के साथ भीड़भाड़ वाले अदालत परिसर से होकर गुजरे।
जांच में तेजी लाने और मुकदमे की कार्यवाही में देरी नहीं करने को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सभी आरोपियों के लिए अदालत में पेश होना अनिवार्य कर दिया गया है।
म्हात्रे के वकील उमर काजी ने संवाददाताओं से कहा, “आरोप-पत्र के आधार पर आरोप तय करने को लेकर आज (शुक्रवार को) अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों की ओर से दलीलें सुनी गईं। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता के तहत औपचारिक रूप से आरोप तय किए और हमारे मुवक्किलों ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया।”
उन्होंने कहा, ‘‘आरोप-पत्र काफी विस्तृत है, इसलिए हमने दस्तावेजों और सामग्री की पूरी तरह जांच के लिए समय देने का अनुरोध किया है।’’
काजी ने कहा, ‘‘विशेष लोक अभियोजक की ओर से भारतीय न्याय संहिता की धारा 330 के तहत अनुपालन को लेकर अनुरोध किए जाने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है।’’
म्हात्रे के वकील काजी ने कहा कि सह-आरोपी रमेश पवार, प्रमोद निकम और अक्षय करांडे भी अदालत में मौजूद थे।
सह-आरोपी साधना करांडे अभी आधारवाड़ी जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
भाषा जितेंद्र सुरेश
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