जालना, 28 मई (भाषा) मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बृहस्पतिवार को कहा कि अगर अनिश्चितकालीन अनशन के दौरान उन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या होती है, तो इसके लिए महाराष्ट्र सरकार जिम्मेदार होगी। जरांगे ने 30 मई से चिलचिलाती धूप में अनशन शुरू करने की घोषणा की।
जरांगे ने पूर्व में कहा था कि वह समुदाय की ‘अधूरी’ मांगों को लेकर अनशन शुरू करेंगे और उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को मराठवाड़ा में कुनबी जाति प्रमाण पत्र वितरित करने के लिए 29 मई की समय सीमा दी थी।
जरांगे ने कहा “मैं चर्चा के लिए पहले ही काफी समय दे चुका हूं। अब कड़ा रुख अपनाने का समय आ गया है। अगर लू लगने से मेरी मौत होती है तो मुख्यमंत्री और सरकार जिम्मेदार होंगे।”
उन्होंने कहा कि जालना जिले के अंतरवाली सारती गांव में उनका आंदोलन देश में हुए किसी भी विरोध प्रदर्शन से ‘अलग’ होगा।
आरक्षण कार्यकर्ता ने कहा, “इस बार मैं किसी छत के नीचे नहीं बैठूंगा। न कोई तम्बू होगा, न कोई छांव। मैं विरोध प्रदर्शन के दौरान पानी, भोजन और यहां तक कि जूते-चप्पल भी त्याग दूंगा। या तो सरकार कदम उठाएगी या मैं मर जाऊंगा।”
जरांगे ने मराठा समुदाय के सदस्यों से मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित अपने विरोध प्रदर्शन स्थल पर इकट्ठा न होने की अपील की।
उन्होंने कहा, “यहां मत आइए। मैं मई की चिलचिलाती गर्मी में अकेला बैठूंगा।”
मराठा नेता ने आरोप लगाया कि बार-बार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों, रैलियों और वार्ताओं के बावजूद मराठा समुदाय के लिए आरक्षण के संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कुछ दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक प्रसाद लाड ने उनसे मुलाकात कर चर्चा की थी।
जरांगे के अनुसार हालांकि उसके बाद इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई।
जरांगे ने सरकार पर मराठा युवाओं के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने का आरोप लगाया और आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को नौकरी देने में हो रही ‘देरी’ पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने पूछा, “चुनावों में मराठा वोटों की जरूरत होती है लेकिन आरक्षण अब भी नहीं दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि उसने तीन लाख कुनबी प्रमाण पत्र जारी किए हैं। क्या यह कोई एहसान है?”
जरांगे ने आरक्षण की मांग के खिलाफ बताए जा रहे मानदंडों पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, “आप कहते हैं कि पश्चिमी महाराष्ट्र में समृद्ध बाग और धनी किसान हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों के पास भी बाग और समृद्धि है। क्या धन या बागवानी आरक्षण का मानदंड है?”
जरांगे ने अपने आगामी विरोध प्रदर्शन को ‘निर्णायक’ लड़ाई बताते हुए कहा, “हमने शांतिपूर्वक सब कुछ समझाया, रैलियां निकालीं, फिर भी आरक्षण नहीं दिया गया। मराठा समुदाय के बच्चों को अधिकारी बनने और अपना भविष्य सुरक्षित करने का अधिकार है।”
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष