जालना, 19 जून (भाषा) मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे का स्थायी समाधान करने में और देरी की गई तो समुदाय ‘बड़ा आंदोलन’ शुरू करेगा।
उन्होंने यह टिप्पणी जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में भाजपा नेताओं प्रसाद लाड और नारायण कुचे के साथ हुई बैठक के दौरान की।
नेताओं ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सरकार के आश्वासनों और फैसलों को लागू करने पर चर्चा की।
जरांगे ने सरकार के 12-सूत्री प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद मराठा आरक्षण की मांग पर अपनी हालिया अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 31 मई को समाप्त कर दी।
उन्होंने बैठक में कहा, ‘इस आंदोलन को अब तीन साल पूरे हो रहे हैं। हर दो महीने में छोटे-छोटे फैसलों की घोषणा करके हमें बेवकूफ न बनाएं। हम सीधे-सादे लोग हैं और हमने सरकार पर भरोसा किया है। उस भरोसे को सही साबित करने के लिए तेजी से काम करें और कोई स्थायी समाधान निकालें अन्यथा हम और भी बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।’
हालांकि, जरांगे ने सरकार के हालिया निर्णयों का स्वागत भी किया। उन्होंने कहा, ‘शिक्षा, चिकित्सा, कृषि और रोजगार क्षेत्रों में मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की तर्ज पर रियायतें देने के लिए सरकार बधाई की पात्र है।’
लेकिन उन्होंने सरकारी आदेशों के क्रियान्वयन में ‘प्रशासनिक लापरवाही’ पर नाराजगी जताई। उन्होंने दावा किया कि पांच जून को मराठा छात्रों को शिक्षा में रियायतें देने के लिए सरकारी आदेश (जीआर) जारी होने के बावजूद स्कूल और कॉलेज अब भी छात्रों से पूरी फीस वसूल रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘स्कूल प्रबंधन का कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।’
इस पर प्रसाद लाड ने आश्वासन दिया कि जिन विद्यार्थियों ने पूरी फीस जमा कर दी है, उन्हें राशि वापस की जाएगी और सरकारी आदेश का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भाषा
शुभम माधव
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