अवैध रेत खनन मामला: जरांगे के सहयोगी को 4.90 करोड़ रुपये के जुर्माने से छूट देने वाला आदेश रद्द

अवैध रेत खनन मामला: जरांगे के सहयोगी को 4.90 करोड़ रुपये के जुर्माने से छूट देने वाला आदेश रद्द

अवैध रेत खनन मामला: जरांगे के सहयोगी को 4.90 करोड़ रुपये के जुर्माने से छूट देने वाला आदेश रद्द
Modified Date: September 28, 2026 / 01:44 pm IST
Published Date: September 28, 2026 1:44 pm IST

जालना (महाराष्ट्र), 28 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के जालना जिले में कथित अवैध रेत खनन के एक मामले में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के एक सहयोगी को 4.90 करोड़ रुपये के जुर्माने से छूट देने वाला आदेश रद्द कर दिया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि संजय नानासाहेब कटारे को जुर्माने की कार्यवाही से छूट देने के संशोधित आदेश की प्रशासनिक समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई।

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला जालना की अंबड तहसील के साष्टपिंपलगांव और डोमलगांव में गोदावरी नदी के तल से करीब 2,000 ‘ब्रास’ (आयतन की स्थानीय माप इकाई) रेत के कथित अवैध खनन और परिवहन से संबंधित है।

उन्होंने बताया कि अप्रैल 2023 में तत्कालीन उपमंडलीय अधिकारी ने 18 लोगों पर जुर्माना लगाया था। इनमें शामिल जरांगे के आंदोलन की कोर कमेटी के सदस्य कटारे पर 4.90 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

कटारे ने बाद में इस कार्यवाही में अपना नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई जिसके बाद तत्कालीन तहसीलदार ने संशोधित आदेश जारी कर उनका नाम जुर्माने की कार्यवाही से हटा दिया था।

बाद में एक स्थानीय निवासी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य के राजस्व मंत्री से संपर्क किया।

जालना जिला प्रशासन के निर्देश पर मामले की जांच की गई जिसमें तत्कालीन तहसीलदार और संबंधित गौण खनिज शाखा के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे।

अधिकारियों ने बताया कि अंबड के उपमंडलीय अधिकारी उमाकांत पारधी ने 21 सितंबर को पिछला आदेश रद्द कर दिया और उन्होंने बहाल किए गए जुर्माने को संबंधित भूमि पर बकाया के रूप में दर्ज कर भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूलने का निर्देश दिया।

उन्होंने तत्कालीन तहसीलदार और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव जालना के जिलाधिकारी को भेजने का भी निर्देश दिया।

जरांगे ने 20 दिन का अपना अनशन 17 सितंबर को समाप्त कर दिया था और महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि मराठा आरक्षण से जुड़ी उनकी मांगों पर तीन महीने के भीतर विचार नहीं किया गया तो वह अपना आंदोलन मुंबई ले जाएंगे।

वह कुनबी जाति की वंशावली के आधार पर मराठा समुदाय के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग कर रहे हैं।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा


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