न्यायपालिका सर्वोपरि है, हमें अदालत का फैसला स्वीकार करना चाहिए: हजारे ने केजरीवाल संबंधी निर्णय पर कहा

न्यायपालिका सर्वोपरि है, हमें अदालत का फैसला स्वीकार करना चाहिए: हजारे ने केजरीवाल संबंधी निर्णय पर कहा

न्यायपालिका सर्वोपरि है, हमें अदालत का फैसला स्वीकार करना चाहिए: हजारे ने केजरीवाल संबंधी निर्णय पर कहा
Modified Date: February 27, 2026 / 08:18 pm IST
Published Date: February 27, 2026 8:18 pm IST

(तस्वीरों के साथ जारी)

पुणे, 27 फरवरी (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल को आरोपमुक्त किए जाने का शुक्रवार को स्वागत करते हुए कहा कि न्यायपालिका सर्वोपरि है और अदालत के फैसले को स्वीकार किया जाना चाहिए।

भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम चलाने वाले हजारे ने केजरीवाल को सलाह दी कि वह समाज और देश के लिए काम करें और अपने या अपनी पार्टी के बारे में न सोचें।

उन्होंने आबकारी नीति मामले के संबंध में केजरीवाल के खिलाफ अतीत में की गई अपनी आलोचनात्मक टिप्पणियों को लेकर कहा कि उस समय अदालत ने कोई फैसला नहीं सुनाया था।

दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को शराब नीति मामले में शुक्रवार को बरी कर दिया और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से नाराजगी जताते हुए कहा कि उसका मामला न्यायिक समीक्षा में खरा उतरने में पूरी तरह विफल रहा।

केजरीवाल को 21 मार्च, 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने आबकारी नीति मामले में एवं बाद में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही सीबीआई ने गिरफ्तार किया गया था। वह 155 दिन जेल में रहे थे और उन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में पत्रकारों से कहा ‘‘हमारा देश न्यायपालिका के बल पर चलता है। न्यायिक प्रणाली देश की सर्वोच्च व्यवस्था है। हमारा राष्ट्र एक बड़ा देश है जिसमें कई राजनीतिक दल, जातियां, पंथ और धर्म हैं और फिर भी यह न्यायिक प्रणाली के कारण ही सुचारू रूप से चल रहा है।’’

उन्होंने कहा कि मजबूत न्यायपालिका के अभाव में आपराधिक तत्व हावी हो जाएंगे और देश में दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

हजारे ने कहा, ‘‘इस मामले में अरविंद केजरीवाल की संलिप्तता के बारे में मैंने जो कुछ भी कहा था, वह न्यायपालिका के फैसले से पहले की बात है। उस समय आरोप लगाए गए थे। अब न्यायपालिका ने अपना फैसला सुना दिया है कि उनका इस (गलत काम) में कोई हाथ नहीं था। हमें इस फैसले को स्वीकार करना होगा।’’

उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री के बारे में अपनी पिछली आलोचनात्मक टिप्पणियों को लेकर कहा, ‘‘अब अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। हमारे लोकतंत्र में न्यायपालिका का सम्मान करना जरूरी है।’’

हजारे ने केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को अपना ‘‘कार्यकर्ता’’ बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘वह मेरे कार्यकर्ता थे। वह और मनीष सिसोदिया मेरे कार्यकर्ता थे।’’

जब हजारे से पूछा गया कि वह केजरीवाल को अब क्या सलाह देना चाहेंगे, तो उन्होंने कहा, ‘‘समाज और देश के लिए काम कीजिए। अपने बारे में या पार्टी के बारे में मत सोचिए।’’

हजारे, केजरीवाल और सिसोदिया 2011 के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन के प्रमुख चेहरे बनकर उभरे थे। इस आंदोलन के दौरान एक मजबूत जन लोकपाल विधेयक को लागू किए जाने की मांग की गई थी। इस आंदोलन ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को हिलाकर रख दिया था।

केजरीवाल ने बाद में आम आदमी पार्टी (आप) का गठन किया और दिल्ली चुनाव में जीत हासिल की। हालांकि, आंदोलन के राजनीतिक मोड़ लेने के बाद हजारे ने खुद को इससे अलग कर लिया था।

हजारे ने मार्च 2024 में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद उनकी आलोचना करते हुए कहा था कि यह विडंबना है कि जन लोकपाल आंदोलन का हिस्सा रहे व्यक्ति को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया है।

उन्होंने केजरीवाल पर करोड़ों देशवासियों के भरोसे को तोड़ने का भी आरोप लगाया था और अफसोस जताया था कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को बर्बाद कर दिया।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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