खरात मामला : दमानिया ने एआई से सीडीआर के विश्लेषण का दावा किया
खरात मामला : दमानिया ने एआई से सीडीआर के विश्लेषण का दावा किया
मुंबई, छह अप्रैल (भाषा) कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार स्वयंभू बाबा अशोक खरात के कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) का विश्लेषण करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ (एलएलएम) ‘क्लाउड’ का इस्तेमाल किया।
दमानिया ने मुंबई में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया कि वह कभी भी कुछ भी अवैध नहीं करेंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर “सुविधा की राजनीति” में लिप्त होने का आरोप लगाया।
खरात का सीडीआर हासिल करने को लेकर दमानिया विपक्षी दलों के निशाने पर हैं, जो इस बात की जांच करने की मांग कर रहे हैं कि वह इसे प्राप्त करने में कैसे कामयाब रहीं।
दमानिया का दावा है कि उन्हें खरात का सीडीआर व्हॉट्सएप पर एक व्यक्ति से मिला, जिसने खुद को जासूस बताया था।
उन्होंने कहा, “मैंने एआई आधारित एलएलएम ‘क्लाउड’ का इस्तेमाल करके पता लगाया कि खरात के मोबाइल फोन से किस व्यक्ति को कितनी बार कॉल किया गया। मैं कभी कोई गैरकानूनी काम नहीं करती। अधिकारियों के साथ जानकारी साझा करने से पहले मैंने एआई टूल की मदद से एक्सेल डेटा को सत्यापित किया था।”
दमानिया ने दावा किया है कि बलात्कार के आरोप में 18 मार्च से जेल में बंद खरात और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच एक अनिर्दिष्ट अवधि के दौरान 17 बार फोन पर बातचीत हुई थी। उन्होंने खरात के फोन से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की रुपाली चकांकर और सुनील तटकरे तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चंद्रकांत पाटिल और आशीष शेलार सहित कई अन्य नेताओं को भी कॉल किए जाने की बात कही है।
दमानिया ने दावा किया कि समता क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी में लेन-देन से जुड़े एसएमएस अलर्ट की संख्या में अजित पवार से संबंधित एक दुर्घटना के समय के आसपास असामान्य वृद्धि देखी गई। उनका इशारा 28 जनवरी को हुए उस विमान हादसे की तरफ था, जिसमें तत्कालीन उपमुख्यमंत्री (अजित पवार) की मौत हो गई थी।
दमानिया ने आरोप लगाया कि 27 जनवरी को असमान्य रूप से 17 एसएमएस प्राप्त हुए, जबकि उसके अगले दिन 19 संदेश, जबकि बाद के दिनों में कई और संदेश आए।
उन्होंने कहा कि संदेशों से खरात के खाते में राशि जमा होने या उसकी निकासी किए जाने का संकेत मिलता है।
दमानिया ने जांच एजेंसियों से इन लेन-देन की प्रकृति का पता लगाने का आग्रह किया। उन्होंने संबंधित वित्तीय लेन-देन और पवार से जुड़ी घटना के बीच संभावित संबंध का आरोप लगाया।
दमानिया ने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से संपर्क करने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि वह केवल सुविधा की राजनीति में लिप्त हैं।
उन्होंने कहा, “वह (फडणवीस) सिर्फ सुविधा की राजनीति करते हैं। पार्थ पवार से जुड़े मुंधावा भूमि मामले में उन्होंने रिपोर्ट लगभग तीन महीने तक दबाए रखी। इसे बजट सत्र के आखिरी दिन जारी किया गया। ये लोग सिर्फ राजनीति करते हैं; इनसे मिलने का कोई फायदा नहीं है। मेरी उम्मीद सिर्फ डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) सदानंद डेट पर टिकी हुई है।”
सीडीआर हासिल करने के बारे में दमानिया ने कहा कि उन्हें यह एक अज्ञात व्यक्ति से प्राप्त हुआ था, जिसने खुद के जासूस होने का दावा किया था।
उन्होंने कहा, “इस तरह की जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए कभी-कभार कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल किया जाता है। मैंने पुलिस को सामग्री सौंप दी है और गहन जांच का अनुरोध किया है।”
भाषा पारुल नरेश
नरेश

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