लातूर, नौ सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के लातूर की एक अदालत ने भूमि संबंधी मामले में 25,000 रुपये की रिश्वत लेने के दोषी पूर्व उप-पंजीयक, कनिष्ठ लिपिक और एक निजी स्टांप विक्रेता को दो-दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने सात सितंबर को दिए अपने आदेश में तीनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अभियोजन के अनुसार, औसा तहसील के शिंदाला गांव के एक निवासी ने जनवरी 2015 में कृषि भूमि की संयुक्त रूप से खरीद का पंजीकरण कराया था। भूमि का पूरा स्टांप शुल्क चुकाने के बावजूद औसा के तत्कालीन उप-पंजीयक अशोक पोमाजी बोरावके (47) ने कथित तौर पर मूल पंजीकृत दस्तावेज सौंपने के लिए 25,000 रुपये की रिश्वत मांगी।
अभियोजन ने बताया कि बाद में बोरावके ने यह राशि कनिष्ठ लिपिक राजेंद्रकुमार नानाराव पाटिल (40) और निजी स्टांप विक्रेता नितिन लक्ष्मीकांतराव आपसिंगेकर (45) के माध्यम से ली।
शिकायत मिलने के बाद जांच की गई और तीनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तीनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश