महाराष्ट्र सरकार ने एमबीबीएस छात्रों के लिए एक वर्षीय सेवा बॉन्ड की अनिवार्यता समाप्त की
महाराष्ट्र सरकार ने एमबीबीएस छात्रों के लिए एक वर्षीय सेवा बॉन्ड की अनिवार्यता समाप्त की
मुंबई, 24 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय सेवा बॉन्ड की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि एमबीबीएस की डिग्री लेने वाले छात्रों की संख्या के मुकाबले सेवा बॉन्ड के लिए उपलब्ध पदों की संख्या बहुत कम है।
सामाजिक जिम्मेदारी सेवा (सेवा बॉन्ड) को खत्म करने के इस फैसले से सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और नगर निगम के मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ गैर सहायता प्राप्त निजी कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को भी फायदा होगा।
सरकार की ओर से 23 जुलाई को जारी आदेश में कहा गया है कि जिन एमबीबीएस डिग्री धारी छात्रों ने यह आदेश जारी होने से पहले ही सेवा बॉन्ड के तहत आवंटित पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है, केवल उन्हें ही बॉन्ड अवधि को पूरा करना होगा।
आदेश में कहा गया कि राज्य में मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती संख्या, हर साल एमबीबीएस डिग्री लेने वाले छात्रों की संख्या तथा इन छात्रों को सेवा बॉन्ड प्रदान करने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों में उपलब्ध सीमित पदों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
इसमें कहा गया कि सीमित पदों के चलते एमबीबीएस पास छात्रों को तय समय के भीतर ये पद उपलब्ध नहीं कराए जा सकते। इसके परिणामस्वरूप योग्य होने के बावजूद कई एमबीबीएस पास छात्रों को स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए जरूरी शर्तों को पूरा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी वाली सेवा पूरी नहीं कर पाते हैं।
इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि हाल ही में एमबीबीएस डिग्री लेने वाले अभ्यर्थी सामाजिक जिम्मेदारी सेवा की अवधि केवल इसलिए पूरी करते हैं कि वे स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए अर्हता हासिल कर सकें। नतीजतन वे अपने पद पर पूरी क्षमता से चिकित्सा सेवाएं नहीं दे पाते हैं।
आदेश के अनुसार, चूंकि इन छात्रों ने हाल ही में एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा किया है इसलिए वे इमरजेंसी सेवाएं देने में भी पूरी तरह सक्षम नहीं होते हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बातचीत के बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने नौ जुलाई, 2025 को चिकित्सा शिक्षा और औषधि विभाग को इस नीति पर फिर से विचार करने के लिए एक प्रस्ताव भेजा था।
जिन लोगों को कोई पद नहीं मिला था या जिन्हें पद तो मिला था लेकिन उन्होंने अभी तक कार्यभार नहीं ग्रहण किया था, उन्हें भी इससे छूट दी गई है।
इस बीच, ‘महाराष्ट्र रेजिडेंट चिकित्सक संघ’ (एमएआरडी) ने इस कदम का स्वागत किया है।
इस अहम सुधार की सराहना करते हुए ‘सेंट्रल एमएआरडी’ ने सरकार से जोरदार अपील की कि वह अब केवल एमबीबीएस की सीट संख्या बढ़ाने के बजाय राज्य की स्वास्थ्य देखभाल संबंधी अवसंरचना को मजबूत करने पर ध्यान दे।
एमएआरडी ने कहा कि अवसंरचना में उचित निवेश के बिना एमबीबीएस की सीटों को बढ़ाने से मेडिकल शिक्षा और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है।
भाषा संतोष नेत्रपाल
नेत्रपाल

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